सुरत शहर 18/09/2025
सूरत शहर के विभिन्न क्षेत्रों में चारों ओर अनेक वसाहतें बसी हुई हैं, जैसे कि बमरोली, वड़ोद, पांडेसरा, जी.आई.डी.सी., सचिन जी.आई.डी.सी. आदि। इन क्षेत्रों में हजारों की संख्या में मजदूर वर्ग, गरीब लोग तथा मध्यम वर्गीय परिवार अपनी मेहनत की कमाई से छोटे-छोटे प्लॉट लेकर मकान बनाकर रहते हैं। इन वसाहतों में रहने वाले लोग लंबे समय से शहर की अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका निभाते हुए भी अपने जीवन की मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।
सूरत महानगरपालिका एवं संबंधित विभागों द्वारा ले-आउट की स्वीकृति के बिना लोगों को पानी, गटर, स्ट्रीट लाइट, सड़क आदि जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं, जिसके कारण इन वसाहतों में रहने वाले हजारों लोग वर्षों से परेशान हो रहे हैं।
रेलवे विभाग के रेवेन्यू एक्ट 84(5) के तहत आने वाली भूमि पर भी हजारों मजदूरों ने अपने मकान बना लिए हैं। किंतु नगरपालिका एवं सरकार की उदासीनता के कारण यहां रहने वाले लोगों को आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
इसके अलावा, टी.पी. स्कीम और बी.पी.एम.सी. एक्ट की धाराओं के अंतर्गत आने वाली वसाहतों में भी सरकार की जिम्मेदारी है कि वहां रहने वाले नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं मिले। किंतु कई जगह देखा गया है कि गरीब मजदूरों की झुग्गी-झोपड़ियों और मकानों को अवैध बताकर बिना विकल्प दिए तोड़ा जाता है, जो मानवीयता के खिलाफ है।
आज भी सूरत महानगरपालिका द्वारा 205 हेक्टेयर रोड को घोषित कर कई सोसायटियों में हजारों लोग बिना पानी, बिजली, गटर और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के रह रहे हैं। 1999 में बनी टी.पी. स्कीम 58 के तहत मेमनगर, मुजिनगर, तुलसीधाम नगर, गोवर्धन नगर, हीराबाग आदि वसाहतों में भी लोग वर्षों से सुविधाओं के अभाव में कठिन जीवन जी रहे हैं।
इस संदर्भ में शहर कांग्रेस समिति की ओर से मांग की जाती है कि –
सभी वसाहतों को तत्काल गवर्नमेंट ले-आउट में शामिल कर मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जाएं।
गरीब मजदूर वर्ग के मकानों को अवैध घोषित कर तोड़े जाने के बजाय उन्हें नियमित कर वैधता दी जाए।
सूरत महानगरपालिका और संबंधित विभाग आवश्यक योजनाएं बनाकर सभी वसाहतों में पानी, सड़क, गटर, स्ट्रीट लाइट आदि की सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराएं।
यदि सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं तो कांग्रेस पार्टी जनहित में उग्र आंदोलन करने को विवश होगी।
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