*०२/१२/२०२५ सूरत शहर
द सूरत डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक की चुनाव प्रक्रिया में राजनीतिक नेताओं के इशारे पर अवैध निर्णय लेने वाले जिला रजिस्ट्रार (सहकारी संस्थाएं), सूरत को तत्काल प्रभाव से हटाने तथा उनके विरुद्ध विभागीय जांच कराने बाबत।
सूरत के वर्तमान जिला रजिस्ट्रार (सहकारी संस्थाएं) काफी लंबे समय से सूरत जिला रजिस्ट्रार कार्यालय में पदस्थ हैं। इन्हें पदोन्नति भी इसी कार्यालय में जिला रजिस्ट्रार के रूप में दी गई है। यह अधिकारी गुजरात सहकारी अधिनियम की गलत व्याख्या कर सूरत एवं तापी जिले के भाजपा के एक गुट के राजनीतिक नेताओं के इशारों पर अवैध निर्णय लेते आ रहे हैं। पूर्व में गुजरात उच्च न्यायालय में उनके निर्णयों को चुनौती दी जा चुकी है और न्यायालय द्वारा उनके विरुद्ध टिप्पणियां भी की गई हैं। चूंकि वे एक निष्पक्ष अधिकारी की छवि नहीं रखते, इसलिए वर्तमान जिला रजिस्ट्रार (सहकारी संस्थाएं) को तत्काल प्रभाव से हटाकर उनके विरुद्ध विभागीय जांच की जानी चाहिए।
द सूरत डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक के वर्तमान बोर्ड का कार्यकाल दिनांक 29-02-2026 को समाप्त हो रहा है। नियमों के अनुसार बोर्ड का कार्यकाल समाप्त होने के 90 दिन पूर्व चुनाव का प्रस्ताव जिला कलेक्टर (निर्वाचन अधिकारी) को भेजना आवश्यक होता है। इसी के अनुसार बैंक की दिनांक 29-10-2025 की बोर्ड बैठक में चुनाव प्रस्ताव तैयार करने का प्रस्ताव पारित किया गया था और बैंक के प्रबंध निदेशक ने उसके अनुसार प्रस्ताव तैयार कर जिला रजिस्ट्रार (सहकारी संस्थाएं) को भेज दिया था।
सूरत जिला रजिस्ट्रार महोदय ने केवल यह कारण बताकर कि “सदस्य समितियों के ऑडिट में खामियां हैं”, प्रस्ताव को वापस लौटा दिया। जबकि नियमों के अनुसार चुनाव प्रस्ताव में यदि कोई खामी हो तो उसकी जांच और सुधार का अधिकार केवल चुनाव अधिकारी (जिला कलेक्टर) को ही है। जिला रजिस्ट्रार को कलेक्टर की शक्ति का उपयोग करने का कोई अधिकार नहीं है। केवल लिखित आदेश पर ही वे अपनी टिप्पणी भेज सकते हैं। इसके अतिरिक्त, बताई गई तथाकथित खामियों को वे बैंक के एमडी के साथ पूर्व में चर्चा कर सुधार भी सकते थे, क्योंकि पद के अनुसार वे स्वयं भी बोर्ड के सदस्य हैं। साथ ही, सदस्य सहकारी समितियों का ऑडिट और वर्गीकरण स्वयं जिला रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा ही किया जाता है, अतः उनके पास ऑडिट वर्ग की पूर्ण जानकारी पहले से उपलब्ध थी। इसके बावजूद उन्होंने इसी आधार पर प्रस्ताव को रोक दिया।
वर्तमान जिला रजिस्ट्रार (सहकारी संस्थाएं), सूरत के इस अवैध और पक्षपातपूर्ण आचरण के कारण 116 वर्ष पुरानी इस प्रतिष्ठित बैंक के इतिहास में पहली बार प्रशासक नियुक्त करने जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे सूरत एवं तापी जिले के हजारों किसान एवं पशुपालक सदस्यों के हितों को भारी नुकसान पहुंचेगा तथा सहकारी क्षेत्र की प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंचेगी। इस प्रकरण में वर्तमान जिला रजिस्ट्रार ने कलेक्टर की शक्तियों का दुरुपयोग कर बैंक के एमडी द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को कथित खामियों के आधार पर वापस लौटा दिया, जिससे वे अपने राजनीतिक आकाओं को प्रसन्न कर सकें। यह संपूर्ण कार्यवाही पूर्णतः अवैध है। इससे किसान एवं पशुपालक सदस्यों का अहित होना निश्चित है।
अतः उपरोक्त सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, लोकहित एवं न्याय के हित में निम्नलिखित तात्कालिक कार्यवाही करने की ससम्मान विनती है:
➤ वर्तमान पक्षपातपूर्ण जिला रजिस्ट्रार (सहकारी संस्थाएं), सूरत को तत्काल प्रभाव से अन्यत्र स्थानांतरित कर, उनके स्थान पर ऐसे निष्पक्ष अधिकारी की नियुक्ति की जाए जिन्होंने पूर्व में सूरत में कार्य न किया हो।
➤ द सूरत डिस्ट्रिक्ट को-ऑपरेटिव बैंक की चुनाव प्रक्रिया नियत समय-सीमा में पूर्ण हो, इसके लिए आवश्यक निर्देश/आदेश जारी किए जाएं।
➤ वर्तमान जिला रजिस्ट्रार की इस अवैध कार्यवाही की विभागीय जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर नियमों के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
आशा है कि सहकारी क्षेत्र की प्रतिष्ठा तथा किसान-पशुपालक सदस्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए तत्काल उचित कार्रवाई की जाएगी।
तत्काल प्रभाव से उचित कार्रवाई की अपेक्षा सहित।
टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्मके खिलाफ सूरत से संवाददाता राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419
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