गुजरात प्रदेश के बेट द्वारका में जेट-स्कीयर हरियाली धंधे पर मीडिया की रिपोर्टिंग के बाद सरकार की खुली नीद कार्यवाही चालू

०३/०२/२०२६ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट

गुजरात प्रदेश के बेट द्वारका में हरियाली गतिविधियों पर तंत्र की कार्रवाई

बेट द्वारका में जेट-स्कीयर हरियाली धंधे पर तंत्र की सख्ती डॉल्फिन वॉच पैरा-सेलिंग जैसी गति विधियाँ यात्रियों के जीवन को जोखिम में डालकर सिर्फ व्यापारिक लाभ के लिए चलाई जा रही थीं।

पहले जेट-स्की और अन्य गति विधियाँ खुलेआम चल रही थीं, जबकि कार्रवाई के बाद समुद्र क्षेत्र खाली दिखाई देने लगा जेट-स्की हरियाली गति विधियाँ करने वालों और उन्हें छूट देने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने की माँग जोर पकड़ रही है।

जेट-स्की द्वारा यात्रियों को हरियाली सवारी कराने वालों पर पुलिस कार्रवाई करने में तंत्र ने देर नहीं लगाई

कार्रवाई के कारण यात्रियों और स्थानीय लोगों में राहत की भावना है, लेकिन सवाल यह है कि ऐसी गैरकानूनी गति विधियाँ आखिर इतने लंबे समय तक कैसे चलती रही आखिर क्यूं प्रशासन को जानकारी नहीं हुई अब बोटिंग करने वालों के पास सर्टिफिकेट भी जाँचे जाएँ तो दूध का दुध और पानी का पानी हो जाएगा

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि बेट द्वारका जैसे धार्मिक-पर्यटन स्थल पर जेट-स्की, डॉल्फिन वॉच, पैरा-सेलिंग, बोटिंग और अन्य वाटर-स्पोर्ट्स गति विधियाँ बिना किसी मानक सर्टिफिकेट और सुरक्षा प्रोटोकॉल के बिना कैसे चल रही थीं।

कई मामलों में लाइफ जैकेट, प्रशिक्षित स्टाफ और जरूरी अनुमति तक नहीं ली गई थी।

इन गतिविधियों से यात्रियों के जीवन को खतरे में डालकर केवल व्यापारिक लाभ कमाया जा रहा था।

दो दिन पहले मामला उजागर होने के बाद सभी संबंधित पोर्ट गतिविधियों पर रोक लगाई गई और मीडिया में यह मामला उजागर होने के बाद तुरंत प्रशासन हरकत में आया। और जिला प्रशासन तथा पोर्ट अधिकारियों ने हरियाली गतिविधियों पर रोक लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी

लेकिन सवाल यह बना हुआ है कि यदि मीडिया में मामला सामने नहीं आता, तो क्या प्रशासन कार्रवाई करता?

जिला कलेक्टर और पोर्ट अधिकारियों के आशीर्वाद के बिना ये सभी गतिविधियाँ कैसे चल सकती थीं?

स्थानीय लोगों का सवाल है कि प्रशासन की जानकारी और मौन सहमति के बिना इतने बड़े पैमाने पर गैरकानूनी वाटर-स्पोर्ट्स गति विधियाँ चलना संभव ही नहीं असंभव है।

यदि अगर अनुमति नहीं थी, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई क्यों नहीं?

मीडिया जागृति के कारण गैरकानूनी गति विधियाँ बंद हुईं, लेकिन तंत्र की आँखों के सामने लापरवाही चलती रही

इस कार्रवाई से स्थानीय नागरिकों और यात्रियों को राहत मिली है।

एक स्थानीय निवासी ने कहा,

अगर मीडिया ने आवाज नहीं उठाई होती, तो शायद ये खतरनाक गतिविधियाँ आज भी चल रही होतीं।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि प्रशासनिक व्यवस्था को जगाने में मीडिया की भूमिका कितनी अहम होती हैं आने वाले समय में ऐसी गैरकानूनी गतिविधियों को स्थायी रूप से रोकने के लिए

सख्त नियमों और नियमित निगरानी की जरूरत है, केवल दिखावटी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा।

टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419

 

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