रमज़ान में रोज़ा खजूर से ही क्यों खोला जाता है? जानिए इसकी धार्मिक और वैज्ञानिक वजहें

रिपोर्टर – दिलशाद अहमद फतेहपुर सीकरी 

रमज़ान के पाक महीने में दुनिया भर के मुसलमान सूरज डूबते ही रोज़ा खोलते हैं। इस समय एक चीज़ लगभग हर इफ़्तार में समान रूप से दिखाई देती है—खजूर। लेकिन सवाल यह है कि रोज़ा खोलने की शुरुआत खजूर से ही क्यों की जाती है?

धार्मिक परंपरा की अहमियत

इस्लाम में रोज़ा खोलते समय खजूर खाने की परंपरा सीधे तौर पर पैग़ंबर मोहम्मद की सुन्नत से जुड़ी हुई है।

इसके अलावा इस्लाम की पवित्र किताब क़ुरान में भी खजूर का कई स्थानों पर उल्लेख मिलता है, जिससे इसकी धार्मिक अहमियत और बढ़ जाती है।

⚡ लंबे रोज़े के बाद शरीर को तुरंत ऊर्जा

ब्रिटेन में रजिस्टर्ड डाइटीशियन शहनाज़ बशीर, जो खुद रोज़ा रखती हैं, कहती हैं, पूरे दिन भूखे-प्यासे रहने के बाद शरीर को सबसे पहले तेज़ ऊर्जा की ज़रूरत होती है।

खजूर में प्राकृतिक शर्करा होती है, जो शरीर में जल्दी ग्लूकोज़ में बदल जाती है और थकान को तुरंत कम करती है।

इसके साथ-साथ इसमें मौजूद जटिल कार्बोहाइड्रेट धीरे-धीरे ऊर्जा देते रहते हैं, जिससे कमजोरी महसूस नहीं होती।

पोषण से भरपूर फल

ब्रिटेन में रजिस्टर्ड डाइटीशियन शहनाज़ बशीर कहती हैं, खजूर सिर्फ मीठा फल नहीं है, बल्कि यह पोषण का पूरा पैकेज है।
इसमें आयरन, विटामिन B6, विटामिन A और विटामिन K जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो रोज़ा खोलते समय शरीर की ज़रूरतों को पूरा करने में मदद करते हैं।

पानी की कमी से बचाव

हालाँकि खजूर सूखा फल है, फिर भी यह शरीर में पानी बनाए रखने में सहायक होता है।

इसमें मौजूद पोटैशियम एक प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट की तरह काम करता है, जो शरीर की कोशिकाओं में पानी को संतुलित रखता है।

इसीलिए खजूर को पानी के साथ लेना सबसे बेहतर माना जाता है।

️ ज़्यादा खाने से रोकता है

रमज़ान में कई बार इफ़्तार के समय ज़्यादा खाने की वजह से वज़न बढ़ने लगता है।

खजूर में मौजूद फाइबर पेट को जल्दी भरने का एहसास देता है, जिससे अनावश्यक ओवरईटिंग से बचाव होता है।

परंपरागत रूप से पहले खजूर खाने और फिर नमाज़ पढ़ने का यही फायदा है कि शरीर को पाचन शुरू करने का समय मिल जाता है।

पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद

लंबे समय तक खाने-पीने से दूरी की वजह से कब्ज़ और पेट फूलने की समस्या आम हो जाती है।
खजूर फाइबर का अच्छा स्रोत है, जो आंतों की गतिविधि को बेहतर बनाता है और पाचन को आसान करता है।

अगर खजूर पसंद न हो तो?

आजकल इंटरमिटेंट फास्टिंग का चलन बढ़ रहा है, जो काफी हद तक रमज़ान के रोज़ों जैसा ही होता है।

अगर किसी को खजूर सीधे खाना पसंद न हो, तो उसे दूध, दही या स्मूदी में मिलाकर भी लिया जा सकता है।

इसके अलावा खजूर की कई किस्में होती हैं—कठोर, मुलायम, पतले छिलके वाली—जिससे हर स्वाद के लिए विकल्प मौजूद है।

✅ निष्कर्ष

खजूर रोज़ा खोलने का सिर्फ एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि सेहत के लिहाज़ से भी एक आदर्श भोजन है।

यही वजह है कि सदियों से इफ़्तार की शुरुआत खजूर से करने की परंपरा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।

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