सामाजिक संस्था ‘यस वी कैन’ के बैनर तले वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शेषपाल सिंह ‘शेष’ की एक और श्रीमती राज फौजदार की छह कृतियों सहित सात पुस्तकों का एक साथ हुआ लोकार्पण

संवाददाता अर्जुन रौतेला आगरा। युवा समाजसेविका प्रीति फौजदार द्वारा स्थापित और संचालित सामाजिक संस्था ‘यस वी कैन’ के तत्वावधान में वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती राज फौजदार के हरीश नगर, सिकंदरा स्थित आवास पर आगरा और देश के जाने-माने साहित्यकारों द्वारा सात पुस्तकों का एक साथ लोकार्पण किया गया।
लोकार्पित कृतियों में देश के अग्रणी बाल साहित्यकार डॉ. शेषपाल सिंह ‘शेष’ द्वारा संस्कृत श्लोकों के काव्यात्मक भावार्थ की पुस्तक ‘मुक्त-मणि माला’ और वरिष्ठ साहित्यकार राज फौजदार द्वारा विभिन्न विषयों पर रचे गए 730 दोहों की कृति ‘दोहादित्य’ के साथ-साथ उनके द्वारा बच्चों के लिए लिखी गई पाँच कृतियाँ- किस्सा कोटर का, चलें गाँव की ओर, चूहे की शादी, चटपटी बाल पहेलियाँ और कोयल काकी शामिल रही।
अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. आर एस तिवारी ‘शिखरेश’ ने बाल साहित्य की इन कृतियों को बच्चों के मनोविज्ञान को छूने वाली सरलतम अभिव्यक्ति कहकर सराहना की।
मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार और जाने-माने गीतकार डॉ. देवेंद्र तोमर (मुरैना) ने राज फौजदार की कृति ‘किस्सा कोटर का’ पर चर्चा करते हुए कहा कि ऐसी कृति दुर्लभ है जिसमें पक्षियों के जीवन से जुड़े किस्से इतने रोचक ढंग से प्रस्तुत किए गए हैं मानो आँखों देखा हाल ही प्रस्तुत किया गया हो। ये किस्से मनोरंजक के साथ-साथ ज्ञानवर्धक भी बन गए हैं।


विशिष्ट अतिथि आरबीएस कॉलेज की पूर्व प्राचार्य और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सुषमा सिंह ने कहा कि श्रीमती राज फौजदार की बाल रचनाएँ बच्चों की जिज्ञासा वृत्ति को बढ़ाने वाली और चमत्कृत करने वाली हैं। चटपटी बाल पहेलियाँ तो बहुत ही रुचिकर, सरल और बच्चों की कल्पना शक्ति को बढ़ावा देने वाली हैं।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. ब्रज बिहारी लाल ‘बिरजू’ ने ‘दोहादित्य’ की समीक्षा करते हुए कहा कि राज फौजदार एक बहु आयामी साहित्य साधिका हैं। उनकी लेखनी अपनी बात कह पाने में ईमानदारी का परिचय देती है।
उन्होंने मुक्त-मणि माला कृति की समीक्षा करते हुए कहा कि डॉ. शेष ने भारतीय ज्ञान का उपदेश परक और स्मरणीय संयोजन काव्य रूप में प्रस्तुत कर सराहनीय कार्य किया है।
देश के अग्रणी बाल साहित्यकार डॉ. शेषपाल सिंह ‘शेष’ ने कहा कि साहित्य की विभिन्न विधाओं में बाल रचनाओं के सृजन की अत्यधिक आवश्यकता है। राज फौजदार की तरह अन्य साहित्यकारों को भी बालकों के लिए विविध विषयों पर उत्कृष्ट काव्य, निबंध, कहानी, पहेलियाँ आदि का लेखन करना चाहिए ताकि बच्चे कल्याणकारी मार्ग ग्रहण कर सकें। उन्होंने कहा कि श्रीमती राज जी द्वारा साहित्य के माध्यम से बालकों के लिए पथ प्रदर्शन उत्तमोत्तम है।


विशिष्ट अतिथि केंद्रीय हिंदी संस्थान की पूर्व निदेशक प्रो. बीना शर्मा और निवेदिता दिनकर ने भी लोकार्पित कृतियों की सराहना की।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राजेंद्र मिलन, डॉ. राजीव शर्मा ‘निस्प्रह’, रामेंद्र शर्मा ‘रवि’, रेनू उपाध्याय, एसएन शर्मा, आचार्य उमाशंकर पाराशर, संजय गुप्त, प्रभु दत्त उपाध्याय, रवींद्र वर्मा, राकेश निर्मल, राम अवतार शर्मा, डॉ. अखिलेश शुक्ल, अशोक गोयल, रेखा अग्रवाल, विजया तिवारी, डॉ. आभा चतुर्वेदी, दुर्गेश शर्मा, कमला देवी और नीनू गर्ग ने भी लोकार्पित रचनाओं की बानगी प्रस्तुत कर सबको भाव विभोर कर दिया।
इससे पूर्व रमा वर्मा ‘श्याम’ ने माँ शारदे की वंदना कर समारोह का शुभारंभ किया। कार्यक्रम संयोजक अशोक फौजदार, अलका शर्मा, एडवोकेट संजय कुमार, नंद नंदन गर्ग और शरद गुप्त ने अतिथियों का स्वागत किया। कुमार ललित ने संचालन और कर्नल वैभव फौजदार ने आभार व्यक्त किया।

अन्य खबरों हेतु संपर्क करें संवाददाता अर्जुन रौतेला 8868868461

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gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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