गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
सूरत में गैस की कमी और बढ़ती कालाबाजारी से श्रमिकों में आक्रोश, मजदूरी बढ़ाने की मांग
सूरत : शहर में इन दिनों रसोई गैस की भारी कमी और बढ़ती कालाबाजारी के कारण प्रवासी श्रमिकों तथा वीविंग उद्योग से जुड़े कामदारों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। श्रमिकों का कहना है कि यदि 50 से 60 प्रतिशत तक गैस की उपलब्धता कम हो जाती है तो वीविंग उद्योग चलाना मुश्किल हो जाता है। उनके अनुसार उन्हें केवल उतनी ही गैस मिलती है जिससे किसी तरह जीवनयापन हो सके और कामकाज चलता रहे।
श्रमिकों का कहना है कि कई लोग गैस के दाम बढ़ाकर बेच रहे हैं, जिसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। लगभग 50 प्रतिशत कामदारों ने मजदूरी बढ़ाने की मांग उठाई है, क्योंकि उन्हें पर्याप्त गैस नहीं मिल रही है। रसोई गैस की कमी के कारण किराना और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम भी बढ़ रहे हैं, जिससे कामदारों के जीवन पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार यार्न के दामों में भी 30 से 40 रुपये तक की बढ़ोतरी अलग-अलग डेनियर में की गई है। इसके कारण कई वीवर्स को पहले से लिए गए ऑर्डर पूरे करने में कठिनाई हो रही है और वे धीरे-धीरे यार्न खरीदकर काम पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं।
कोरोना जैसी स्थिति न बने इसलिए मजदूरी बढ़ाने की मांग
अंजनी इंडस्ट्रियल और वीवर्स एसोसिएशन के प्रमुख विजय मांगुकिया ने बताया कि गैस की कमी के बीच कुछ तत्व गैस के दाम बढ़ाकर फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी स्थिति पहले भी कोरोना काल के दौरान लॉकडाउन में बनी थी, जब श्रमिकों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। ऐसी स्थिति दोबारा न बने इसलिए मजदूरी बढ़ाने की मांग की जा रही है।
उन्होंने बताया कि वीविंग उद्योग की मौजूदा स्थिति को देखते हुए लगभग 50 प्रतिशत श्रमिक अपने गांवों की ओर लौटने लगे हैं। इसके बाद भी यार्न के दामों में 30 से 40 रुपये की बढ़ोतरी से हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
कलेक्टर को लिखित और मौखिक रूप से रजुआत करने का निर्णय
श्रमिकों को गैस सिलेंडर की कमी को लेकर कलेक्टर को सोमवार को लिखित और मौखिक रूप से रजुआत की जाएगी। पिछले दो दिनों से सूरत और उधना रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में श्रमिक अपने गांव जाने के लिए पहुंच रहे हैं।
सुबह 8:00 बजे उधना-दानापुर ट्रेन और 10:30 बजे तापती गंगा ट्रेन में श्रमिकों की भारी भीड़ देखी जा रही है। ट्रेन में बैठने तक की जगह नहीं मिल रही है।
प्रवासी श्रमिकों का कहना है कि गैस की बढ़ती कालाबाजारी के कारण रोजमर्रा के जीवन पर सीधा असर पड़ रहा है। सामान्य तौर पर लगभग 1200 रुपये में मिलने वाला गैस सिलेंडर अब 2500 से 3000 रुपये तक में भी उपलब्ध नहीं हो रहा है। ऐसे में श्रमिकों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।
श्रमिकों और उद्योग से जुड़े लोगों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि गैस की कालाबाजारी पर तुरंत रोक लगाई जाए और आम लोगों को उचित कीमत पर गैस उपलब्ध कराई जाए। टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई की खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419
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