फतेहपुर सीकरी में गहराता जा रहा है भूजल संकट, बढ़ता प्रदूषण

संवाददाता अर्जुन रौतेला आगरा। विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक नगरी फतेहपुर सीकरी और इसके आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है। क्षेत्र का भूजल न केवल नीचे जा रहा है, बल्कि अत्यधिक खारेपन (Salinity) और फ्लोराइड (Fluoride) के खतरनाक स्तर से भी दूषित हो चुका है।
भारत सरकार की ओर से जल स्तर की गिरावट रोकने के लिये अनेक गंभीर प्रयास किये जा रहे है और अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं क्रियान्वित किये जाने का प्रयास हो रहा है।लेकिन इसके बावजूद जलस्तर और उसकी गुणवत्ता में गिरावट आना जारी है।है।उ प्र ग्रामीण मजदूर संगठन उपरोक्त मौजूदा स्थितियों को लेकर अत्यंत गंभीर है और मानता है कि इनको और अधिक बढ़ने से रोका जाना चाहिये।पर्यावरण विभाग और सिंचाई विभाग को इसके लिए योजना बनानी चाहिये।

उ प्र के सिंचाई विभाग के सिंचाई कार्य मंडल-III, आगरा के तहत अधिशासी अभियंता लोअर खंड आगरा के प्रशासन में फतेहपुर सीकरी विकास खंड क्षेत्र आता है,लेकिन इसकी तेरहमोरी बांध और खारी नदी जैसी जल नियंत्रण एवं जल प्रवाह जैसी योजनाएं उपेक्षित कर रखी गयी हैं।तेरहमोरी बांध जनपद का सबसे बड़ा बांध है किंतु इसके गेट टूटे पडे होने के कारण बडे जलग्राही क्षेत्र से पहुंचने वाला मानसून काल में पहुंचने वाला पानी नहीं रुकता।अगर यह पानी रुकने लगे तो रसातल में पहुंच चुका भूजल स्वत:रिचार्ज हो जायेगा और पानी की गुणवत्ता में भी बदलाव आयेगा।
किरावली तहसील के गांवों से होकर बहने वाली खारी नदी के बहाव को तेरह मोरी बांध का डिसचार्ज और भरतपुर जनपद के चिकसाना बांध का डिस्चार्ज नियंत्रित करता है। तेरहमोरी बांध के गेटों के टूटा रहने से नदी मानसून काल में भी लगभग बहाव शून्य सी रहती है।जब तक नदी बहती थी तब तक किरावली तहसील के अधिकांश गांवों हैंड पंप सुचारू थे, कूंओं में से अपने कम में गुणवत्ता वाली पानी मिलता था।

हालांकि कई अध्ययन समय समय पर होते रहे हैं किंतु सबसे सशक्त साक्ष्य एवं मार्गदर्शक Central Ground Water Board (CGWB), under the Ministry of Jal Shakti, की ‘AQUIFER MAPPING AND MANAGEMENT PLAN AGRA DISTRICT, U.P.’’ (Category Aquifer Mapping ), Authors: Sujatro Ray Chowdhuri, Ajai Vir Singh रिपोर्ट है।अगर इसके अनुसार ही कार्य योजना बनाकर ‘एक्यूफर रिचार्ज’ (Aquifer Recharge) कर क्षेत्र का परिदृश्य बदला जा सकता है।

वर्तमान में फतेहपुर सीकरी विकास खंड के तमाम गांवों में जनपद के सबसे अधिक समस्या ग्रस्त रहे सदर तहसील के गांव ‘पचगईं पट्टी’ जैसी स्थिति बनती जा रही है।जहां कि निम्न गुणवत्ता वाले पानी का उपयोग करने भर से गांव शारीरिक विकलांगता से अभिशप्त हो गया।अब भी यहां के लोगों को उनकी शारीरिक क्षमता को कम आंक कर सेवा योजक रोजगार देने से बचना चाहते हैं।


एक श्रमिक नेता के रूप में मुझे यहां के लोगों की शारीरिक विकलांगता के कारण रोजगार को पाने को लेकर बनी चली आ रही समस्या की जानकारी है,इस लिये मैं नहीं चाहता कि फतेहपुर सीकरी की मेहनतकश श्रम शक्ति को भी इस प्रकार की समस्या का सामना करना पडे।

फतेहपुर सीकरी क्षेत्र न्यून गुणवत्ता वाले पानी की समस्या से तो जूझ ही रहा है,साथ ही वायु प्रदूषण के कारण भी जन स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का सामना कर रहा है। साल के मानसून कालीन महीनों के अतिरिक्त अन्य महीनों में वायु प्रदूषण की भरपूरिता युक्त रहती है।राजस्थान की ओर से आने वाली हवाओं में पार्टिकुलेट मैटर (PM) की भरपूरिता जन स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। फेफड़ों की गहराई (Alveoli) तक पहुंच और सीधे रक्त प्रवाह (Bloodstream) में मिलने के अनुकूल माने जाने वाले 10 माइक्रोमीटर, 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाले सूक्ष्म कणों गंभीरता से लिये जाने की सामायिक जरूरत है।हरियाली आच्छादन से ही इनका प्रकोप कम किया जा सकता है किंतु जब तक भूजल की स्थिति में सुधार नहीं होगा तब तक क्षेत्र में हरियाली का विस्तार नहीं हो सकेगा।मेंझे बार बार कहना अखर रहा है किंतु हकीकत यही है कि जब तक तेरह मोरी बांध के गेटो की मरम्मत करवाके मानसून कालीन पानी का कहराव सुनिश्चित नहीं हो जाता क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में सुधार लाया जाना असंभव है। स्थानीय प्रशासन नागरिकों को बूंद बूंद बचाकर ,जल संचयन (Rainwater Harvesting) के लिये लगातार प्रेरित करता रहता है,लेकिन पता नहीं सिंचाई विभाग से तेरहमोरी बांध के गेटों की मरम्मत का महत्वपूर्ण कार्य क्यों नहीं करवा पाता।

श्रमिक नेता तुलाराम शर्मा ने बताया कि उप्र ग्रामीण मजदूर संगठन के नेता के रूप में वह श्रम विभाग,स्वास्थ्य विभाग और पर्यावरण विभाग सहित कई अन्य विभागों को पत्र लिय कर चिंता जता चुके हैं।उन्होंने कहा कि पूर्व में फतेहपुर सीकरी क्षेत्र में श्रमिका मुख्य रूप से पत्थर खदानों और चक्की के पाट बनाये जाने का कार्य करते थे किंतु अब ये दोनो ही कार्य दस साल से बंद है,कोई वैकल्पिक श्रम सेवा अवसर क्षेत्र में संभव नहीं हो सका है, इसलिये श्रमिकों को भरतपुर या आगरा जाकर काम ढूंढना पड़ता है,किंतु जैसे ही आधार कार्ड या लेबर कार्ड देखने पर उनके फतेहपुर सीकरी से संबंधित होने की जानकारी सेवा योजक को मिलती है, कार्य अवसर देने वालों का रुख बदल जाया करता है।उपरोक्त को दृष्टिगत श्रम विभाग से अनुरोध है कि उपरोक्त स्थिति शासन के संज्ञान में लाकर श्रमिकों के स्थ्यास्थ्य परीक्षण का शिवरत तो लगवा ही दिये जायें और फतेहपुर सीकरी को पंचगाई पट्टी बनने से रोका जाये।

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gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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