गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
गुजरात प्रदेश सुरत शहर में
5 किलो गैस सिलेंडर के लिए लोगों को करना पड़ रहा भारी संघर्ष
सामान्य रूप से लोग 14.2 किलो के बड़े गैस सिलेंडर का उपयोग करते हैं, लेकिन उसकी डिलीवरी में हो रही लगातार देरी के कारण अब लोग 5 किलो के छोटे सिलेंडर की ओर रुख कर रहे हैं। जो सिलेंडर पहले आपातकालीन जरूरत के समय उपयोग में आता था, वही अब लोगों का मुख्य सहारा बन गया है। हालांकि इस छोटे सिलेंडर को प्राप्त करने के लिए भी श्रमिक वर्ग को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
डॉक्यूमेंट जांच और डिजिटल पेमेंट की बाध्यता
गैस एजेंसियों द्वारा पारदर्शिता के नाम पर कड़ी जांच प्रक्रिया अपनाई जा रही है। लाइन में लगे लोगों से आधार कार्ड, राशन कार्ड और लाइट बिल जैसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। घंटों तक लाइन में खड़े रहने के बावजूद उपभोक्ताओं को नई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई एजेंसियां केवल ऑनलाइन पेमेंट ही स्वीकार कर रही हैं, जिससे उन श्रमिकों को गैस नहीं मिल पा रही जिनके पास स्मार्टफोन या डिजिटल सुविधा उपलब्ध नहीं है।
कालाबाजारी का बढ़ता खतरा, 1500 रुपये तक वसूली
अभाव का फायदा उठाते हुए कालाबाजारी भी तेजी से बढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार 5 किलो गैस सिलेंडर के लिए लोगों से 1500 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। एक तरफ रोजगार का संकट और दूसरी तरफ बढ़ती महंगाई ने श्रमिक वर्ग की कमर तोड़ दी है।
घरों में चूल्हा जलाना मुश्किल, लकड़ी भी नहीं मिल रही
स्थानीय श्रमिकों का कहना है कि वे सुबह 8 बजे से लाइन में खड़े रहते हैं, फिर भी गैस मिलना मुश्किल हो गया है। खाना बनाने में भारी परेशानी हो रही है और लकड़ी भी आसानी से उपलब्ध नहीं है। एजेंसियां साफ कह रही हैं कि नकद भुगतान नहीं चलेगा, केवल ऑनलाइन पेमेंट करने पर ही गैस मिलेगी। ऐसे में गरीब और मजदूर वर्ग के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
पांडेसरा क्षेत्र में स्थिति भयावह
वैश्विक परिस्थितियों का असर अब सूरत के औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। पांडेसरा क्षेत्र में रसोई गैस की अभूतपूर्व कमी देखने को मिल रही है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं, जहां लोग घंटों इंतजार करने को मजबूर हैं। छोटे बच्चों वाले परिवारों में भोजन की चिंता बढ़ गई है।
सुबह 4 बजे से लग रही कतारें
पिछले कुछ दिनों से स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि पांडेसरा की गैस एजेंसियों पर सुबह 4 बजे से ही लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं। पुरुषों के साथ महिलाएं भी अपने घर का काम छोड़कर घंटों लाइन में खड़ी रहने को मजबूर हैं। लोगों में डर बना हुआ है कि यदि गैस नहीं मिली तो घर का खाना और बच्चों का टिफिन कैसे बनेगा।
रसोई गैस की इस कमी और व्यवस्था में खामियों के कारण आम जनता, खासकर श्रमिक वर्ग, गंभीर संकट का सामना कर रहा है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि इस समस्या का तुरंत समाधान किया जाए और गैस वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाया जाए।
टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419
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