द्विशताब्दी वर्ष पर आगरा कॉलेज में भव्य एवं ऐतिहासिक लोकार्पण एवं शिलान्यास समारोह सम्पन्न

अर्जुन रौतेला आगरा। आगरा कॉलेज, आगरा के द्विशताब्दी वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आज महाविद्यालय की 35 बीघा भूमि पर स्थापित भव्य “गंगाधर शास्त्री मंडप” में लोकार्पण एवं शिलान्यास समारोह अत्यंत उत्साह और गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ। यह ऐतिहासिक अवसर आगरा कॉलेज की दो शताब्दियों की शैक्षणिक धरोहर को नई दिशा देने वाला मील का पत्थर सिद्ध हुआ।

समारोह का शुभारंभ उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री (उच्च शिक्षा) श्री योगेंद्र उपाध्याय के आगमन पर एनसीसी यू.पी. बटालियन द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर से हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता आगरा मंडल के मंडलायुक्त एवं आगरा कॉलेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री शैलेंद्र कुमार सिंह (आई.ए.एस.) ने की। मंच पर प्रो. एस. पी. सिंह (प्राचार्य, सेंट जॉन्स कॉलेज), प्रो. वंदना अग्रवाल (प्राचार्या, बी. जैन कॉलेज), आगरा कैंट विधायक डॉ जी एस धर्मेश , प्रो. राजेश प्रकाश (क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, आगरा मंडल), महिला आयोग की सदस्य श्रीमती निर्मला दीक्षित, भाजपा महानगर अध्यक्ष श्री राजकुमार गुप्ता तथा उप्र विश्वविद्यालय-महाविद्यालय महासंघ के अध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान प्रोफेसर जयंती रंजन शारदा विश्वविद्यालय सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम ने स्वागत भाषण में बताया कि आगरा कॉलेज की स्थापना 21 नवंबर 1823 को पंडित गंगाधर शास्त्री द्वारा दान की गई भूमि पर हुई थी। उन्होंने वर्षों से अप्रयुक्त पड़ी प्राचार्य आवास के पीछे की 35 बीघा भूमि को पुलिस प्रशासन के सहयोग से पुनः उपयोग में लाकर बाउंड्री वॉल निर्माण एवं नई शैक्षणिक परियोजनाओं के शिलान्यास को महाविद्यालय की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह भूमि अब आने वाली पीढ़ियों के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए नई संभावनाओं का केंद्र बनेगी।

मुख्य अतिथि श्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि आगरा कॉलेज का यह आयोजन पंडित गंगाधर शास्त्री को सच्ची श्रद्धांजलि है, जिन्होंने दो सौ वर्ष पूर्व शिक्षा के लिए यह पवित्र भूमि समाज को समर्पित की थी। उन्होंने कहा कि नए शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना न केवल महाविद्यालय बल्कि प्रदेश की उच्च शिक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देगी। उन्होंने युवाओं से देश निर्माण में भागीदारी, कौशल विकास, राष्ट्रभक्ति तथा ज्ञान-विज्ञान आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का आधार विकसित उत्तर प्रदेश है और छात्र इसमें सबसे बड़ी शक्ति हैं।इस अवसर पर आगरा कॉलेज के संस्थापक गंगाधर शास्त्री की सातवीं पीढ़ी के वंशज – जिन्हें आज के द्विशताब्दी कार्यक्रम हेतु बिहार के गया के निकट के ग्राम करहरी से आमंत्रित किया गया था उनका भी सम्मान और स्वागत किया । शास्त्रीजी के परिजनों ने गंगाधर शास्त्री और आगरा कॉलेज से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज भी प्राचार्य , आगरा कॉलेज , को उपलब्ध कराए ।

मंडलायुक्त श्री शैलेंद्र कुमार सिंह ने आगरा कॉलेज के गौरवशाली इतिहास को रेखांकित करते हुए कहा कि यह संस्था पुनः अपने स्वर्णिम काल की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि छात्र अपने शिक्षकों के आचरण से प्रेरणा लेते हैं और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों को सही दिशा दें। उन्होंने कौशल विकास, सकारात्मक ऊर्जा, लक्ष्य-साधना और नैतिक मूल्यों को सफलता की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि पंडित गंगाधर शास्त्री के सपनों को साकार करना हम सभी का दायित्व है।

समारोह के दौरान छात्रों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनमें शिव तांडव तथा भारतीय सांस्कृतिक एकता पर आधारित समूह नृत्य प्रस्तुति ने विशेष सराहना प्राप्त की। इसी कार्यक्रम में महाविद्यालय की प्रोफेसर शैफ़ाली चतुर्वेदी के संपादकत्व में प्रकाशित वार्षिक पत्रिका “वाणी” के द्विशताब्दी वर्ष विशेषांक का भी विमोचन भी मंचासीन अथितियों द्वारा किया गया।

 

मुख्य अतिथि द्वारा जिन प्रमुख परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया गया, उनमें आचार्य चाणक्य परीक्षा भवन, गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता एवं जनसंचार अध्ययन संस्थान, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर विदेशी भाषा अध्ययन केंद्र, पं. गंगाधर शास्त्री प्राच्य विद्या, भाषा एवं संस्कृति अध्ययन केंद्र, डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक न्याय अध्ययन केंद्र, ब्रज कौशलधाम कौशल विकास संस्थान, यूजीसी-एचआरडी अकादमिक स्टाफ कॉलेज तथा आगरा कॉलेज अतिथि गृह प्रमुख हैं। इन संस्थानों की स्थापना से महाविद्यालय में शोध, नवाचार, व्यावसायिक प्रशिक्षण और शैक्षणिक विस्तार की नई राहें खुलेंगी।

अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम ने कहा कि यह समारोह महाविद्यालय की समृद्ध शैक्षणिक परंपरा, विकास एवं उत्कृष्टता का सशक्त प्रतीक है। प्राचार्य महोदय ने बताया कि 1823 में गंगाधर शास्त्री के अनुदान से स्थापित इस आगरा कॉलेज के सौ वर्ष पूरे होने के अवसर पर तत्कालीन ब्रिटिश सरकार के वायसराय अर्ल ऑफ़ रीडिंग का कार्यक्रम हुआ था । इसके कुछ दिन बाद ही आगरा कॉलेज में महात्मा गांधी जी ने विद्यार्थियों शिक्षकों को संबोधित किया था । शताब्दी वर्ष के अवसर पर आगरा कॉलेज के तात्कालिक प्राचार्य के मार्गदर्शन में आगरा विश्वविद्यालय का प्रस्ताव पारित हुआ जिसे गवर्नर जनरल इन कौंसिल में पारित करा एक जुलाई 1927 को आगरा विश्वविद्यालय की स्थापना की गई । इसके उपरांत सवा सौ साल पूरे होने पर भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद और 150 वर्ष पूर्ण होने पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने आगरा कॉलेज के समारोहों में भाग लिया । आज इसी कड़ी में दो सौ वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में माननीय उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेंद्र उपाध्याय जी गंगाधर शास्त्री मंडप में उपस्थित हो इस ऐतिहासिक क्षण को और गौरवमयी बनाया है ।

इस अवसर पर आगरा कॉलेज के अनेक सेवानिवृत प्राचार्य एवं शिक्षकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम में चार चांद लगाये ।

धन्यवाद ज्ञापन एसोसिएट प्रोफेसर शशिकांत पांडेय ने किया जिसमें इन्होंने प्रबन्ध समिति पदाधिकारियों , आगरा कॉलेज ट्रस्ट के सदस्यों , आमंत्रित अतिथियों , जन प्रतिनिधियों , मीडिया कर्मियों , सम्मानित आगरा के नागरिकों , कॉलेज के शिक्षकों कर्मचारियों और विद्यार्थियों को इस कार्यक्रम को शानदार और सफल बनाने हेतु धन्यवाद ज्ञापन किया ।

कार्यक्रम का सफल एवं कुशलता पूर्वक संचालन डॉ. शशिकांत पांडे एवं प्रो. शैफाली चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से किया।

“आज कार्यक्रम के दौरान एक अत्यंत भावुक एवं ऐतिहासिक क्षण तब उपस्थित हुआ जब करहरी ग्राम, जिला गया (बिहार) से पंडित गंगाधर शास्त्री जी के परिवार की सातवीं पीढ़ी के सदस्य महाविद्यालय पहुँचे। वे अपने साथ गंगाधर शास्त्री जी से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज लेकर आए, जिन्हें उन्होंने प्राचार्य प्रो. सी. के. गौतम को विधिवत सौंपा। महाविद्यालय की ओर से उनका स्मृति चिन्ह एवं पटका पहनाकर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।”

कार्यक्रम में उपप्राचार्य प्रो. पी. बी. झा, प्रो. भूपाल सिंह, प्रो. शशिकांत पांडे, प्रो. मृणाल शर्मा, प्रो. पूनम चाँद, प्रो. रीता निगम, प्रोफेसर जय श्री भारद्वाज प्रो. भूपेंद्र कुमार चिकारा, डॉ. गौरव कौशिक, प्रो. अमित अग्रवाल, प्रो. विक्रम सिंह, प्रो. भूपेंद्र सिंह, प्रोफेसर अरुणोदय बाजपेई प्रोफेसर शरद भारद्वाज प्रोफेसर वाई एन त्रिपाठी प्रोफेसर जयप्रकाश प्रोफेसर एस के शर्मा प्रो. अशोक कुमार सिंह, डॉ. नितेश शर्मा, डॉ. शिव कुमार सिंह, डॉ. अनुराग पालीवाल, डॉ. पी. के. दीक्षित, डॉ. सत्यदेव शर्मा, डॉ. आनंद प्रताप सिंह, डॉ. एस. एस. खिरवार, डॉ. जिनेश कुमार सिंह, डॉ. दिनेश कुमार मौर्य, डॉ. दिग्विजय नाथ राय, प्रो. संतोष कुमार सिंह, डॉ. शैलेंद्र कुमार, प्रो. धर्मेंद्र प्रताप सिंह, प्रो. डी. पी. सिंह, प्रो. संध्या यादव, डॉ. आर. पी. पाल, प्रो. एम. एम. खान, प्रो. विवेक भटनागर, प्रो. अवधेश जौहरी, प्रो. गौरव प्रकाश, प्रो. जावेद, प्रो. वीरी सिंह जूरैल, प्रो. रिजु निगम, प्रो. के. के. सिंह, प्रो. चंद्रशेखर शर्मा, प्रो. डी. सी. मिश्रा, प्रो. अमित रावत, प्रो. लोकेंद्र पाल सिंह, डॉ. रवि शंकर सिंह, प्रो. उमाकांत चौबे, प्रो. डी. के. सिंह, डॉ. दिग्विजय पाल सिंह, डॉ. रंजीत सिंह, डॉ. धर्मवीर सिंह, डॉ. अविनाश जैन, डॉ. कृष्णवीर सिंह यादव, डॉ. अर्चना यादव, डॉ. श्याम गोविंद सिंह, डॉ. आशीष तेजस्वी, प्रो. दीपक उपाध्याय, डॉ. विकास सिंह, डॉ. केशव सिंह, प्रो. चंद्रवीर सिंह, प्रो. उमेश शुक्ला, प्रो. महावीर सिंह, प्रो. सुमन कपूर, प्रो. दीपा रावत, प्रो. ममता सिंह, प्रो. नीरा शर्मा, प्रो. शेफाली चतुर्वेदी, प्रो. नीरजा महेश्वरी, डॉ. यादवेंद्र शर्मा, डॉ. अनुज पाराशर, प्रो. आशीष कुमार, डॉ. अमरेश बाबू , प्रोफेसर मनीष शंकर तिवारी प्रोफेसर राजीव द्विवेदी, प्रो. अमित चौधरी, प्रो. संध्या मान, प्रो. अल्पना ओझा, प्रो. जॉली सिंह, प्रोफेसर सुनीता गुप्ता प्रो. अंशु चौहान, प्रो. सुनीता गुप्ता, प्रो. मनीषा दोहरे, प्रो. गीता महेश्वरी, डॉ. उमेश कुमार, प्रो. मंजू शर्मा, प्रो. अनुराधा नेगी, प्रोफेसर शादा जाफरी प्रो. सारिका यादव सहित अनेक शिक्षक-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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