गुजरात हाईकोर्ट ने होमगार्ड को दैनिक भत्ता मामले में गुजरात सरकार को दिया निर्देश

गुजरात हाईकोर्ट ने सरकार को होमगार्ड का दैनिक भत्ता बढ़ाने का निर्देश दिया

 

गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट

गुजरात अहमदाबाद: एक महत्वपूर्ण आदेश में गुजरात हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि होमगार्ड को मिलने वाले दैनिक भत्ते को वर्तमान 450 रुपये से बढ़ाकर पुलिसकर्मियों के न्यूनतम वेतन के बराबर किया जाए।

वर्तमान में पुलिस कांस्टेबल को न्यूनतम वेतन लगभग 21,000 से 25,000 रुपये प्रतिमाह मिलता है, जबकि होमगार्ड को कुल मासिक भुगतान इससे काफी कम मिलता है। राज्य सरकार द्वारा भत्ता बढ़ाने में अनिच्छा दिखाने पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि “यह राज्य की तानाशाही के समान है। भत्ते की समीक्षा तक करने को तैयार न होना राज्य की मनमानी को दर्शाता है, जबकि राज्य को एक आदर्श नियोक्ता माना जाता है।”

यह निर्देश वर्ष 2020 में होमगार्ड द्वारा दायर याचिका के जवाब में दिया गया है। याचिका में मांग की गई थी कि होमगार्ड की सेवाओं को नियमित सेवा माना जाए, उन्हें नियमित वेतन और भत्ते दिए जाएं तथा उनकी सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष तय की जाए।

न्यायमूर्ति मौलिक शेलत ने पिछले महीने होमगार्ड की “समान कार्य के लिए समान वेतन” (Equal Pay for Equal Work) की मांग को खारिज कर दिया था, लेकिन राज्य सरकार को एक महीने के भीतर होमगार्ड का दैनिक भत्ता बढ़ाने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही सभी राज्य सरकारों को होमगार्ड का भत्ता बढ़ाने पर विचार करने का निर्देश दे चुका है, और केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका भी खारिज हो चुकी है। राज्य सरकार के इस तर्क को भी अदालत ने अस्वीकार कर दिया कि वह सुप्रीम कोर्ट में स्वतंत्र समीक्षा के लिए जाएगी।

अदालत ने कहा, “राज्य सरकार भारत सरकार के निर्देशों की अवहेलना नहीं कर सकती और न ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का अनादर कर सकती है, जब तक कि उन्हें स्वयं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संशोधित न किया जाए।”

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को होमगार्ड का दैनिक भत्ता 450 रुपये से बढ़ाकर इतना करना होगा कि वह पुलिस कर्मियों को मिलने वाले न्यूनतम वेतन के बराबर हो।

साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि यह सही है कि राज्य सरकार होमगार्ड को मृत्यु मुआवजा सहित कुछ अन्य सुविधाएं देती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि सरकार उनसे सेवा लेकर कम भत्ता देकर उनका शोषण करे। टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419

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