गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
गुजरात प्रदेश सुरत महा नगर पालिका में अ पक्ष उम्मीदवारों का पिछला रिकॉर्ड 30 वर्षों में सूरत मनपा चुनाव में केवल दो ही अपक्ष उम्मीदवार विजेता बने
गुजरात प्रदेश सुरत महा नगर पालिका देश की आर्थिक राजधानी// सूरत शहर में पिछले तीन दशकों में राजनीतिक, सामाजिक और जनसंख्या से जुड़े कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। शहर के भौतिक विकास के साथ-साथ राजनीतिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन दर्ज किए गए हैं। सूरत में अब व्यक्तिगत राजनीति का प्रभाव घटा है और संगठित (पार्टी आधारित) राजनीति का दौर मजबूत हुआ है।
चुनावी प्रक्रिया में हुए परिवर्तनों के चलते अ पक्ष उम्मीदवारों के लिए जीत के लगभग सभी रास्ते बंद हो गए हैं। पहले छोटे वार्ड और व्यक्तिगत प्रभाव वाले नेता अपक्ष उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतते थे, लेकिन अब चुनाव संगठन और पार्टी की ताकत के आधार पर लड़े और जीते जा रहे हैं।
पिछले 30 वर्षों से सूरत महानगरपालिका में भाजपा का एकछत्र शासन बना हुआ है। वर्ष 1985 में सूरत की जनसंख्या लगभग 11 लाख थी, जो आज बढ़कर करीब 65 लाख तक पहुंच गई है। शहर का भौगोलिक विस्तार भी 120 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर लगभग 464 वर्ग किलोमीटर हो गया है।
वार्डों और क्षेत्रों के विस्तार के साथ-साथ राज्य चुनाव आयोग द्वारा वार्ड सीमाओं और संख्या में भी बदलाव किए गए हैं। पहले वार्ड छोटे होते थे और कॉर्पोरेटरों का व्यक्तिगत प्रभाव अधिक रहता था, लेकिन अब बड़े वार्ड और बढ़ी हुई जनसंख्या के कारण राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं।
1985 में चंपक भाडा पटेल और 1985 में ही प्रकाश देसाई अपक्ष के रूप में चुने गए
पांडेसरा-वडोद-क्षेत्र के चंपक भाडा पटेल वर्ष 1985 में महानगरपालिका चुनाव अपक्ष उम्मीदवार के रूप में जीते थे। बाद में वे भाजपा से जुड़ गए थे। वर्ष 2000 में उन्हें टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने अपक्ष चुनाव लड़ा और फिर से जीत हासिल की।
इसी प्रकार प्रकाश देसाई भी अपक्ष उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतकर कॉर्पोरेटर बने थे। वर्ष 2000 में उन्होंने पुनः अपक्ष उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीता था।
हालांकि समय के साथ इन दोनों नेताओं का राजनीतिक प्रभाव कम होता गया। बदलते परिसीमन, बढ़ती जनसंख्या और राजनीतिक संरचना के कारण अब अपक्ष उम्मीदवारों के लिए जीत हासिल करना बेहद कठिन हो गया है।
वर्तमान समय में सूरत महानगरपालिका चुनावों में अ पक्ष उम्मीदवारों की जीत लगभग असंभव मानी जा रही है, क्योंकि चुनाव पूरी तरह से संगठित राजनीतिक दलों के नियंत्रण में आ चुके हैं।
टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419
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