*पुलिस प्रशासन मौन पीड़ित पत्रकार के साथ न्याय कब होगा*
द जर्नलिस्ट एसोसिएशन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमेश पांडेय
खन्ना महोबा। जनपद में कानून व्यवस्था इस कदर निचले स्तर पर जा रही है कि कहीं भी क्षेत्र में घूम रहे दबंग प्रवृत्ति के लोग पुलिसिया शह पर राह चलते लोगों पर वार करना शुरू कर दें और पीड़ित की तहरीर पर पुलिस सिर्फ राजीनामा करने का दबाव बनाने लगे तो भी जिम्मेदारों से सवाल पूछना लाजिमी हो जाता है।
पूरा मामला जनपद महोबा के खन्ना थाना क्षेत्र का है जहां के चिचारा गांव निवासी गणेश चंद्र पांडेय पुत्र रामनारायण पांडेय ने मुख्यमंत्री सहित उपमुख्यमंत्री, डीजीपी लखनऊ, डीआईजी चित्रकूट धाम तथा पुलिस अधीक्षक महोबा को संयुक्त रूप से प्रार्थना पत्र भेजते हुए बताया कि जब वह दिनांक 14 नवंबर को शाम साढ़े पांच बजे अपने घर जा रहा था तभी हीरा सिंह के घर के सामने गांव का पिंटू सिंह अपनी गाड़ी लेकर आया और मेरी गाड़ी में सामने से अपनी मोटरसाइकिल से टक्कर मार दी और उसी गाड़ी से मोनू सिंह उतरा जो कि शराब के नशे में चूर थे, पीड़ित ने बताया कि वह दोनों लोग उसे जबरदस्ती गाड़ी समेत दूसरी जगह ले गये जहां बृजेन्द्र उर्फ नीतू, मनोज, मान सिंह ने एकसाथ मिलकर घसीटते हुए ले गये और पीड़ित का सोने का माला तथा जेब में पड़े 3500 रूपये छीन लिये। पीड़ित के अनुसार उपरोक्त सभी दबंग गाली गलौज करते हुए जान से मारने की लगातार धमकी भी देते रहे हैं। इस घटना से भयभीत जब प्रार्थी ने थाना प्रभारी सहित क्षेत्राधिकारी को मामले से अवगत कराया तो पुलिस क्षेत्राधिकारी भी उल्टे पीड़ित पर राजीनामा करने के लिए दबाव बनाने लगे। जिसमें पुलिस की दबंगों के साथ उतरी दरियादिली की भी पैहम चर्चा हो रही है। वहीं प्रार्थी ने बताया कि उसके साथ कभी भी कोई अनहोनी घटना घटित हो सकती है जिसके जिम्मेदार उपरोक्त लोग होंगे।
बताते चलें कि जनपद में धूर्तता की मिसाल बनी पुलिस जब दबंगों को अपनी छत्रछाया में पनाह दे दे तो उनसे इंसाफ की उम्मीद करना अपने आप में बेईमानी सी होगी। हालांकि सूबे के मुखिया प्रदेश में कानून व्यवस्था स्थापित होने का भले ही ढिंढोरा पीट रहे हो लेकिन धरातल पर पुलिस की कार्यशैली किसी से छुपी नहीं है।
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