” हिंदी पखवाड़ा” माधुर्य सांस्कृतिक एवम् साहित्यिक संस्था” का काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ

अर्जुन रौतेला संवादाता। “माधुर्य सांस्कृतिक एवम् साहित्यिक संस्था” आगरा के तत्वावधान में “हिंदी पखवाड़ा” के तहत एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।

मुख्य अतिथि नीरज जैन और अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र मिलन ने की इस अवसर पर विशेष रूप से नीरज जैन को हिंदी सेवी सम्मान से विभूषित किया गया।
संस्थाध्यक्ष निशिराज ने अपने वक्तव्य में कहा कि –
सुंदर हरियाली आली में फूल हर एक मुस्काता है।
पर नीरज सब से ही परे रहकर सुंदर कहलाता है।
आदर्श शिक्षिका व युवा कवयित्री पूजा ‘प्रियल’ ने हिंदी को कुछ इस तरह से गुनगुनाया कि-
“हैं हम तो हिन्दुस्तानी भैया अपनी भाषा हिंदी है
पर ये भी बहना सच है कि अपना दिल तो हिंदी है”


लगभग तीन घंटे चली काव्य गोष्ठी में सर्व श्री परमानंद शर्मा, आदर्श नंदन गुप्त, डॉ.यशोयश, शरद गुप्ता, विनय बंसल, इंदल इंदु, प्रकाश गुप्ता बेबाक, बिटिया समाइरा विजयगुप्त, राजकुमारी चौहान, रमा वर्मा, पूजा प्रियल, पदमावती पदम, सुधा वर्मा, प्रार्थना मिश्रा, नीलम रानी गुप्ता, डॉ.राजीव शर्मा, दीपक श्रीवास्तव, राकेश निर्मल, आशुतोष शर्मा, नागेश शुक्ला, नितेश जैन, हरवीर परमार, दुर्गेश पाठक आदि ने सस्वर काव्य पाठ किया।
कुशल संचालन संस्थाध्यक्ष निशिराज ने किया और धन्यवाद ज्ञापित राजकुमार जैन ने किया।

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gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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