M S M E कपड़ा गारमेन्ट निर्यातको को बड़ी राहत ब्याज सब्सिडी योजना का स्वागत गारमेंट एक्सपोर्ट हब की मांग तेज श्री चंपालाल बोधरा अध्यक्ष ( सी ए आई टी)

* ४/१/२०२६ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट

* एमएसएमई कपड़ा–गारमेंट निर्यातकों को बड़ी राहत: ब्याज सब्सिडी योजना का स्वागत, गारमेंट एक्सपोर्ट हब की माँग तेज*

*चम्पालाल बोथरा CAIT*

भारत सरकार द्वारा एमएसएमई निर्यातकों के लिए प्री और पोस्ट शिपमेंट एक्सपोर्ट क्रेडिट पर 2.75 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी की ऐतिहासिक घोषणा का कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) की कपड़ा एवं गारमेंट समिति ने पुरजोर स्वागत किया है। कैट का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों के बीच यह निर्णय देश के कपड़ा, गारमेंट, एपैरल और मेड-अप्स सेक्टर को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

कैट कपड़ा एवं गारमेंट समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष चम्पालाल बोथरा ने कहा कि लंबे समय से ऊँची ब्याज दरें छोटे गारमेंट निर्यातकों के लिए एक बड़ी बाधा बनी हुई थीं। नई ब्याज सब्सिडी योजना से न केवल कार्यशील पूंजी (Working Capital) सस्ती होगी, बल्कि इससे उत्पादन लागत कम होगी, जिससे भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।”

कपड़ा–गारमेंट उद्योग को मिलने वाले सीधे लाभ:

• ब्याज में बड़ी राहत: 2.75% वार्षिक ब्याज सब्सिडी निर्यातकों के वित्तीय बोझ को कम करेगी।

• अग्रिम लाभ: बैंक द्वारा ब्याज में राहत सीधे निर्यातक को अग्रिम रूप से (Upfront) मिलेगी, जिससे लिक्विडिटी बढ़ेगी।

• कवर: यह प्री-शिपमेंट और पोस्ट-शिपमेंट दोनों पर लागू है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹50 लाख प्रति वर्ष है।

गारमेंट एक्सपोर्ट हब की तत्काल आवश्यकता

कैट ने इस अवसर पर मांग दोहराई है कि ब्याज सब्सिडी के साथ-साथ सूरत, तिरुपुर और लुधियाना जैसे प्रमुख कपड़ा केंद्रों को ‘डेडिकेटेड गारमेंट एक्सपोर्ट हब’ के रूप में विकसित किया जाए।

हब बनने के फायदे:

• निर्यात से जुड़ी दस्तावेज़ी प्रक्रिया और अनुपालन (Compliance) सरल होगा।

• छोटे व्यापारी और स्टार्ट-अप्स को सीधे विदेशी बाजारों से जुड़ने का मौका मिलेगा।

• स्थानीय स्तर पर लाखों नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

चम्पालाल बोथरा ने बताया की :“2.75% की ब्याज सहायता छोटे उद्यमों को वैश्विक बाज़ार में चीन और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले खड़े होने की वास्तविक ताक़त देगी। अब सरकार को चाहिए कि इस योजना को दीर्घकालिक नीति का रूप दे और सूरत जैसे शहरों में एक्सपोर्ट क्लस्टर्स को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस करे।”

कैट की प्रमुख माँगें निम्न प्रकार है

1. स्थायी नीति: ब्याज सब्सिडी योजना को कम से कम 5 वर्षों के लिए स्थायी किया जाए।

2. विशेष एक्सपोर्ट हब नीति: कपड़ा क्लस्टर्स के लिए अलग से ‘एक्सपोर्ट हब’ पॉलिसी बनाई जाए।

3. समावेशी प्रोत्साहन: महिला उद्यमियों और नए एमएसएमई स्टार्ट-अप्स के लिए अतिरिक्त 1% की विशेष छूट दी जानी चाहिए

टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ नरेंद्र प्रताप सिंह कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419

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