१३ /०१/२०२६ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र भाई पटेल को गुजरात प्रदेश कांग्रेस महा मंत्री श्री दर्शन भाई ए नायक ने लिखा पत्र उन्होंने ने पत्र में लिखा कि मेरी ओर से पूर्व में की गई सभी प्रस्तुतियों के अनुक्रम में यह पत्र प्रस्तुत कर रहा हूँ।
कांकडिया गांव, तालुका अंबिका जी, जिला सूरत में सूरत महानगरपालिका के कॉन्ट्रैक्टर द्वारा लंबे समय तक किए गए अवैध ठोस कचरा (Solid Waste) डंपिंग के मामले में जांच के पश्चात संबंधित कॉन्ट्रैक्टर पर ₹2.50 करोड़ का दंड लगाया गया है। सूरत महानगरपालिका के आयुक्त द्वारा केवल महानगरपालिका के कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं, किंतु सूरत महानगरपालिका के सॉलिड वेस्ट विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित एक्ज़ीक्यूटिव इंजीनियर के विरुद्ध आज दिनांक तक कोई विभागीय जांच प्रारंभ नहीं की गई है।
यह मामला अब केवल कानूनी उल्लंघन तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह बार-बार होने वाली पर्यावरणीय अपराध प्रवृत्ति (Repeated Environmental Offending) का स्पष्ट उदाहरण बन चुका है। ऐसी स्थिति में कठोर एवं उदाहरणात्मक कार्रवाई करना अनिवार्य है, ताकि भविष्य में कोई भी एजेंसी या अधिकारी इस प्रकार की अवैध गतिविधि करने का साहस न कर सके। केवल आर्थिक दंड लगाकर ऐसे आदतन अपराधियों को छोड़ देना उन्हें पुनः ऐसी गतिविधियां करने के लिए प्रोत्साहित करता है और स्थिति यथावत बनी रहती है। इससे कानून का भय समाप्त होता है, अपराध को परोक्ष प्रोत्साहन मिलता है और पर्यावरण संरक्षण व्यवस्था को मज़ाक बनाकर रख दिया जाता है। अतः दंड के साथ-साथ वैधानिक नियम उल्लंघन की कठोर कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए।
सूरत शहर पूरे देश में स्वच्छता पुरस्कार (Clean City Model) के लिए जाना जाता है। किंतु शहर को स्वच्छ रखने के नाम पर उसका कचरा आसपास के गरीब एवं ग्रामीण क्षेत्रों की भूमि पर अवैध रूप से डालना और प्रदूषण फैलाना स्वच्छता नहीं, बल्कि गंभीर पर्यावरणीय अन्याय है। स्वच्छता पुरस्कार प्राप्त करने के लिए सूरत शहर को साफ रखकर सूरत जिले के गांवों की भूमि, जल और जनस्वास्थ्य की बलि देना किसी भी दृष्टि से स्वीकार्य या नैतिक नहीं है। ऐसी प्रवृत्तियाँ शहर–गांव के बीच गहरी पर्यावरणीय असमानता पैदा करती हैं और राज्य की स्वच्छता एवं सस्टेनेबिलिटी नीतियों के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध हैं।
यदि नगर आयुक्त के कार्यक्षेत्र में ही SMC द्वारा मात्र 50% सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग की जा रही हो, कचरा इधर-उधर फेंका जा रहा हो और फिर भी शहर को स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिल रहा हो, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। यदि बिना 50% कचरा प्रोसेस किए एजेंसी के बिल पास कर दिए गए हैं, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है? इस राशि की वसूली कौन करेगा?
यदि ऐसे repeated offenders के विरुद्ध उदाहरणात्मक और कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो अन्य एजेंसियाँ भी इसी प्रकार की अवैध गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित होंगी। यदि जिम्मेदार अधिकारी कानून की जवाबदेही से बचते रहेंगे, तो स्वच्छता पुरस्कार केवल आंकड़ों तक सीमित रह जाएंगे।
अतः लोकहित में आपसे दृढ़ मांग की जाती है कि—
1. लगातार लापरवाही बरतने वाली एजेंसी **सी.डी. ट्रांसपोर्ट** के विरुद्ध Environment (Protection) Act, 1986 के अंतर्गत तत्काल एफआईआर दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई की जाए।
2. सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए जिम्मेदार Executive Engineer एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक तथा SMC के अंतर्गत विभागीय कार्रवाई प्रारंभ की जाए।
3. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 एवं Solid Waste Rules, 2016 के अंतर्गत सॉलिड वेस्ट निपटान की अंतिम जिम्मेदारी विभाग प्रमुख की होती है। अतः सूरत म्यूनिसिपल कमिश्नर की prima facie संलिप्तता की राज्य सरकार द्वारा स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
4. इस प्रकरण में ऐसी कठोर deterrent punishment निर्धारित की जाए, जो पूरे राज्य में स्पष्ट संदेश दे कि इस प्रकार की गतिविधियाँ किसी भी परिस्थिति में सहन नहीं की जाएंगी।
5. सूरत सहित राज्य के सभी महानगरों में कचरा निपटान प्रक्रिया का स्वतंत्र environmental audit एवं financial audit कराया जाए।
6. यदि रिकॉर्ड पर यह है कि सी.डी. ट्रांसपोर्ट द्वारा केवल 50% प्रोसेसिंग कार्य किया गया है, तो अब तक उसके कितने बिल पास किए गए? कितनी राशि की रिकवरी निकाली जानी चाहिए? स्थल निरीक्षण करने वाले इंजीनियरों ने क्या जांच की और बिलों की सिफारिश क्यों की? किसके निर्देश पर यह राशि जारी की गई? जब रीसाइक्लिंग हुई ही नहीं, तो भुगतान क्यों किया गया? स्थल पर लगभग 10 लाख टन कचरे का पहाड़ कैसे बना? हाई टेंशन लाइन के नीचे कचरे के ढेर के कारण कितने शॉर्ट सर्किट हुए? इन सभी बिंदुओं पर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
यदि मेरी उपरोक्त प्रस्तुति पर कोई उत्तर नहीं दिया गया, तो हमें सूरत महानगरपालिका के मेयर एवं कमिश्नर के विरुद्ध व्यक्तिगत शिकायत दर्ज करने के लिए विवश होना पड़ेगा। इस घोटाले में सार्वजनिक धन की जो अनियमितता हुई है, उसकी पूर्ण वसूली हेतु उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करनी पड़ेगी। आपसे अपेक्षा है कि इस विषय की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए जाएंगे और एक सक्षम, निष्पक्ष एवं ईमानदार जांच अधिकारी की नियुक्ति की जाएगी।
यदि इस मामले में तत्काल, कठोर एवं कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो जनस्वास्थ्य के हित में यह संपूर्ण प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) एवं अन्य संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए हम बाध्य होंगे।
यह विषय पर्यावरण, ग्रामीण स्वास्थ्य, न्याय, राज्य की स्वच्छता नीति एवं राज्य की प्रतिष्ठा से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। अतः लोकहित में आपके नेतृत्व में उदाहरणात्मक और ऐतिहासिक कार्रवाई की अपेक्षा करता हूँ।
टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ नरेंद्र प्रताप सिंह कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419
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