तहसील प्रशासन का ‘ऐतिहासिक’ कारनामा: बिना कोर्ट आर्डर अन्न भूमि को रणभूमि बनाने की तैयारी!

एत्मादपुर (आगरा): जनपद की एत्मादपुर तहसील इन दिनों अपने एक अजीबोगरीब और विवादित कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। आरोप है कि यहाँ का प्रशासन ‘कागजी आदेश’ से पहले ही ‘धरातल पर कार्रवाई’ करने में माहिर हो गया है। मामला एक कृषि भूमि के विवाद का है,

जहाँ एसडीएम कोर्ट की पत्रावली में अभी तक कोई ठोस आदेश दर्ज नहीं है, लेकिन मौके पर पुलिस और प्रशासनिक अमला एक पक्ष को लाभ पहुँचाने के लिए मुस्तैद खड़ा नजर आ रहा है। यह स्थिति किसी भी समय एक ‘खूनी संघर्ष’ में तब्दील हो सकती है।
विवाद की जड़: अपनों के बीच उपजा ‘जमीनी मोह’
विवाद की मुख्य धुरी एक कृषि भूमि है, जिस पर जिला पंचायत सदस्य मानवेंद्र सिंह चौहान और डॉ. अरविंद कुमार चौहान आमने-सामने हैं।
* मानवेंद्र सिंह चौहान का दावा: जमीन डॉ. ए.के. सिंह के पास गिरवी रखी गई थी, जिसका लिखित एग्रीमेंट उनके पास मौजूद है। एग्रीमेंट में स्पष्ट उल्लेख है कि बैनामा वापस किया जाएगा।

* डॉ. अरविंद चौहान का पक्ष: उनका कहना है कि जमीन का बैनामा पिछले वर्ष उनके नाम हो चुका है, लेकिन उन्हें कब्जा नहीं मिल पा रहा है।
प्रशासन पर गंभीर सवाल: बिना आदेश ‘मुद्दी’ कैसे लगी?
सबसे बड़ा सवाल तहसील प्रशासन की कार्यशैली पर उठ रहा है। डॉ. अरविंद का दावा है कि 24 अक्टूबर 2025 को तहसील प्रशासन के आदेश पर पुलिस बल की मौजूदगी में खेत की ‘मुद्दी’ (सीमांकन) की गई थी। वहीं, मानवेंद्र सिंह का सीधा आरोप है कि उस तारीख में तहसील या संबंधित विभाग से ऐसा कोई आदेश पारित ही नहीं हुआ है।

> “जब कोर्ट में मामला विचाराधीन है और कोई लिखित आदेश नहीं है, तो प्रशासन किसके इशारे पर खड़ी फसल में पानी लगाने से रोक रहा है और जबरन कब्जा दिलाने का प्रयास कर रहा है?”
> — मानवेंद्र सिंह चौहान, जिला पंचायत सदस्य

भ्रष्टाचार और कुर्सी की हनक के आरोप
जिला पंचायत सदस्य ने तहसील और पुलिस प्रशासन पर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों के पास इस मामले में कोई ठोस स्पष्टीकरण नहीं है। कागजों में सन्नाटा है, लेकिन मौके पर प्रशासनिक सक्रियता “मैदानी न्याय” की ओर इशारा कर रही है।
जिलाधिकारी की चौखट पर न्याय की गुहार
मामले की गंभीरता और संभावित टकराव को देखते हुए मानवेंद्र सिंह चौहान ने संपूर्ण प्रकरण की जानकारी जिलाधिकारी आगरा को दी है। अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन इस ‘बिना आदेश वाली कार्रवाई’ की जांच कराएगा या फिर एत्मादपुर तहसील का यह “ऐतिहासिक कारनामा” किसी बड़ी अनहोनी का सबब बनेगा?
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