गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष श्री अमित भाई चावड़ा जी के जन आक्रोश यात्रा में उन्होंने कहा कि वन भूमि अधिकार कानून–2006 लागू हुए लगभग 20 वर्ष हो चुके हैं, फिर भी नर्मदा जिले के लोगों के जंगल भूमि के दावे आज तक लंबित क्यों हैं? भाजपा सरकार जवाब दे : अमित चावड़ा
• गुजरात भूमि राजस्व अधिनियम की धारा 73 AA के तहत आदिवासियों की जमीनों को NA (गैर-कृषि) कराकर हड़पने का बड़ा घोटाला चल रहा है : अमित चावड़ा
• नर्मदा शुगर फैक्ट्री में किसानों को गन्ने का भाव प्रति टन ₹5,000 दिया जाए, यह मांग : अमित चावड़ा
• सरकार की विफल नीतियों के कारण आदिवासी क्षेत्रों में छात्रों का ड्रॉपआउट रेशियो बढ़ा : अमित चावड़ा
• SOU प्रोजेक्ट में स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार देने के बजाय भाजपा के करीबी लोगों को एजेंसी बनाकर स्थानीय युवाओं का शोषण किया जा रहा है : अमित चावड़ा
• अनुसूची-5 और पेसा एक्ट की अनदेखी कर विकास परियोजनाओं के नाम पर आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन छीनी जा रही है : अमित चावड़ा
• अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमी के कारण मरीज इलाज के लिए अन्य जिलों में जाने को मजबूर : तुषार चौधरी
गुजरात में जन आक्रोश यात्रा के आज तीसरे चरण के दसवें दिन, दक्षिण गुजरात में चल रही यात्रा के दौरान गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष श्री अमित भाई चावड़ा ने आज सुबह 9:00 बजे राजपीपला से प्रस्थान कर गोपालपुरा, नया वाघपुरा, गरुडेश्वर, कोयरी, केवड़िया, वगडिया, गोरा, बोरिया, राज पीपला, खमार, बोरिद्रा, मांडण, खुंटअंबा, मोजी, मोबि और डेडिया पाड़ा का दौरा किया। दक्षिण गुजरात में यात्रा के दसवें दिन विभिन्न क्षेत्रों में उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया। यात्रा के दौरान बाइक रैली निकाली गई तथा स्थानीय लोगों से संवाद कर उनकी समस्याएं और पीड़ा सुनी गई।
नर्मदा शुगर फैक्ट्री में किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। खेती की लागत में निरंतर वृद्धि, खाद-बीज के ऊंचे दाम और मजदूरी खर्च को देखते हुए किसानों को गन्ने का भाव ₹5,000 प्रति टन देने की जोरदार मांग श्री अमित चावड़ा ने की। यदि यह लाभकारी मूल्य नहीं दिया गया, तो खेती करना आर्थिक रूप से संभव नहीं रहेगा। सरकार की कमजोर नीतियों और योजना के अभाव के कारण आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर गिरा है, जिसके परिणामस्वरूप छात्रों के ड्रॉपआउट रेशियो में चिंताजनक वृद्धि हुई है। आदिवासी पट्टी में स्कूलों की दूरी, अपर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण विद्यार्थी शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
वन भूमि अधिकार कानून–2006 लागू हुए लगभग 20 वर्ष होने के बावजूद नर्मदा जिले के हजारों आदिवासी परिवारों के जंगल भूमि के दावे आज भी लंबित हैं। भाजपा सरकार के “डिजिटल इंडिया” के दावों के बीच गरीब आदिवासियों के अधिकारों के प्रमाण जांचने में इतना लंबा समय क्यों लग रहा है? ग्राम सभाओं के प्रस्ताव और खेती के प्रमाण होने के बावजूद प्रशासन द्वारा बार-बार आपत्तियां उठाकर या तकनीकी कारणों से दावों को लंबित रखना सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है। आदिवासियों को जल, जमीन और जंगल का मालिक बनाने के बजाय उन्हें कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर किया जा रहा है।
गुजरात भूमि राजस्व अधिनियम की धारा 73 AA के तहत आदिवासियों की जमीनों की सुरक्षा के कड़े प्रावधान होने के बावजूद, इन जमीनों को NA कराकर हड़पने का बड़ा घोटाला चल रहा है। भू-माफिया फर्जी दस्तावेजों या कथित अनुमतियों के दम पर कीमती जमीनें हड़प रहे हैं। नियम के अनुसार कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना आदिवासी की जमीन गैर-आदिवासी को बेची नहीं जा सकती, फिर भी प्रशासनिक खामियों का फायदा उठाकर जमीन को गैर-कृषि घोषित किया जा रहा है।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (SOU) प्रोजेक्ट के निर्माण के समय स्थानीय आदिवासियों को रोजगार की बड़ी उम्मीद थी, लेकिन वास्तविकता में उन्हें नौकरी नहीं मिली। भाजपा के करीबी लोगों को एजेंसियों के ठेके दिए गए। अपनी ही जमीन पर बने विश्व-स्तरीय प्रोजेक्ट में अधिकार का काम न मिलने से स्थानीय आदिवासी समाज में सरकार के प्रति भारी आक्रोश है। पेसा एक्ट की व्यवस्थाओं की घोर अनदेखी की जा रही है। विकास परियोजनाओं के नाम पर आदिवासी समाज की जीवनरेखा समान जल, जंगल और जमीन छीनने की सुनियोजित साजिश चल रही है। ग्राम सभाओं की अनुमति के बिना भूमि अधिग्रहण कर उद्योगपतियों के लाभ के लिए प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया जा रहा है। इससे आदिवासी समुदाय का आर्थिक और सामाजिक पतन तेज हो रहा है।
विधानसभा कांग्रेस पार्टी के नेता तुषार चौधरी ने कहा कि गांवों और दूरदराज के इलाकों में अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की कमी एक गंभीर समस्या बन चुकी है। स्थानीय स्तर पर पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं, विशेषज्ञ डॉक्टर और आधुनिक उपकरण उपलब्ध न होने से सामान्य बीमारी भी जानलेवा हो सकती है। गंभीर मरीजों को इलाज के लिए अन्य जिलों या बड़े शहरों में जाना पड़ता है, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ और परिवहन खर्च बढ़ता है।
इस अवसर पर विधानसभा कांग्रेस पार्टी के नेता डॉ. तुषारभाई चौधरी, श्री बी.वी. श्री निवासजी, करशन दास बापू भादरका, जिला अध्यक्ष श्री रणजीत सिंह तड़वी, पूर्व विधायक श्री पी.डी. वसावा, युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष श्री संजय भाई निनामा, छोटा उदयपुर जिला अध्यक्ष श्री शशिकांत भाई राठवा, भरूच जिले के पूर्व जिला अध्यक्ष श्री परिमल सिंह राणा सहित बड़ी संख्या में लोग, कार्यकर्ता और नेता उपस्थित रहे।
टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419
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