गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी की खास रिपोर्ट
गुजरात प्रदेश सुरत जिले की तहसीलों में अठारह साल से भारतीय जनता पार्टी का वादा या बाजार वाला शासन
जिले की सभी तालुका पंचायतें विधायक और सांसद होने के बावजूद भी लंबे समय से सूरत जिला पंचायत में भारतीय जनता पार्टी का एक चक्रीय शासन होने के बावजूद जिला पंचायत की तिजोरी खाली पड़ी है। स्व-भंडोल (स्वयं की आय) बढ़ाने में भाजपा के शासक पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं।
सूरत जिला पंचायत के पूर्व विपक्ष नेता दर्शनभाई नायक ने गंभीर आरोप लगाते हुए कई मुद्दों पर भाजपा को आड़े हाथों लिया। उनके अनुसार, यदि तालुका स्तर से ग्रामीण क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों की आय बढ़े तो जिला पंचायत के स्व-भंडोल का आकार भी बढ़ सकता है, लेकिन इसे बढ़ाने में भाजपा शासक कमजोर साबित हुए हैं।
जिले की विभिन्न तालुकाओं में जिला पंचायत के अधीन अनेक स्थावर-जंगम संपत्तियाँ मौजूद हैं, जिनका वर्तमान मूल्य करोड़ों में आँका जा सकता है। फिर भी इन संपत्तियों का मामला लंबे समय से अनसुलझा है। जंत्री दरों पर इनका निपटान कर आय बढ़ाने और उसी आय से विकास कार्य करने की बातें हुई थीं, लेकिन किन कारणों से पूरे मुद्दे को दबा दिया गया—यह स्पष्ट नहीं है। आज भी ये संपत्तियाँ भूतिया बंगलों की तरह सूनी पड़ी हैं और शासकों के पास कोई जवाब नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह सवाल उठ रहा है कि कहीं इसके पीछे कोई गलत मंशा तो नहीं।
राज्य और केंद्र सरकार द्वारा ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत करोड़ों रुपये की ग्रांट दी जाती है, लेकिन ये ग्रांट कहाँ चली जाती है? ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता दिखाई नहीं देती, जिसका खामियाजा गरीब और निर्दोष ग्रामीण जनता को भुगतना पड़ रहा है और वे गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। इसकी जाँच क्यों नहीं होती? “कुदरत के यहाँ देर है, अंधेर नहीं”—यह बात भाजपा शासकों को समझनी चाहिए। विकास के खोखले दावे कर ग्रामीण जनता को गुमराह किया जा रहा है—ऐसा आरोप भी पूर्व विपक्ष नेता दर्शनभाई नायक ने लगाया है।
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अहो आश्चर्यमः सरकारी फार्म में ही ऑर्गेनिक खेती नहीं!
राज्य सरकार किसानों को ऑर्गेनिक खेती के लिए बड़े पैमाने पर प्रेरित कर रही है, जबकि जिले में मौजूद सरकारी फार्मों में ही ऑर्गेनिक पद्धति से खेती नहीं की जा रही। सरकार के विज़न के बावजूद यह स्थिति “दही ससुराल न जाए और पागल को ससुराल जाने की सीख” जैसी बन गई है।
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शिक्षक के बिना स्मार्ट क्लास कैसे चले!
शिक्षा विभाग की हालत ऑक्सीजन पर चलने जैसी है; कर्मचारियों का पर्याप्त स्टाफ नहीं है। शासकों ने स्मार्ट क्लास की बात की है, लेकिन कंप्यूटर शिक्षकों का ही अभाव है। अन्य विषयों के शिक्षकों को एक्सेल या माइक्रोसॉफ्ट सॉफ्टवेयर का अनुभव न हो तो वे बच्चों को कंप्यूटर कैसे सिखाएँगे? केवल उपकरण देने से स्मार्ट क्लास नहीं बनते; उसके लिए पर्याप्त स्टाफ की आवश्यकता है, जो उपलब्ध नहीं कराया जा रहा।
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सरकारी बाबुओं का एक ही जगह डेरा
आईटी-टेक्निकल और ई-ग्राम की बातें जोश-जोश में की गईं, लेकिन उनके अमल के लिए ग्राम पंचायतों में तलाटी-कम-मंत्रियों, ग्रामसेवकों सहित बड़े पैमाने पर पद पिछले दस वर्षों से खाली हैं। राज्य सरकार द्वारा पद भरे नहीं जा रहे। वहीं, तीन वर्ष में स्थानांतरण के नियम को जिला पंचायत के कुछ उच्च अधिकारियों ने दरकिनार कर दिया है और कुछ पसंदीदा कर्मचारियों को एक ही जगह लंबे समय से बैठा रखा है, जिससे भ्रष्टाचार बढ़ा है।
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जाँच समिति की रिपोर्ट दबा दी गई
दो वर्ष पहले जिला पंचायत का नया भवन बना। लोकार्पण के बाद स्व-भंडोल के करोड़ों रुपये के दुरुपयोग का विवाद उठा और जाँच समिति गठित हुई, लेकिन उसकी रिपोर्ट दबा दी गई। जाँच में क्या निकला—यह शासक सार्वजनिक क्यों नहीं करते? जाँच समिति की रिपोर्ट को “भगवान को साक्षी” मानकर सार्वजनिक करने की माँग दर्शन भाई नायक ने की है
टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419
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