मिसाल: पाकुड़ की इस प्रधानाचार्य ने पेश की अनूठी मिसाल, अपने खर्च पर बच्चों को कराया शैक्षणिक भ्रमण

सुमन कुमार दत्ता (पाकुड़ )

पाकुड़: शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों का सर्वांगीण विकास है। इस बात को सच कर दिखाया है पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय गंगड्डा की प्रधानाचार्य खलीदा बेगम ने। संसाधनों की कमी का रोना रोने के बजाय उन्होंने अपने जज्बे से एक ऐसी लकीर खींची है, जिसकी चर्चा आज पूरे जिले में हो रही है।

तीन महिला शिक्षिकाओं के भरोसे 206 बच्चों का भविष्य

मध्य विद्यालय गंगड्डा में कक्षा एक से आठवीं तक की पढ़ाई होती है। वर्तमान में यहाँ कुल 206 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इस विद्यालय की पूरी जिम्मेदारी मात्र तीन महिला शिक्षिकाओं के कंधों पर है। सीमित मानव संसाधन के बावजूद यहाँ की शैक्षणिक व्यवस्था और सकारात्मक माहौल किसी बड़े निजी स्कूल से कम नहीं है।

वेतन की राशि से बच्चों के सपनों को दी उड़ान

प्रधानाचार्य खलीदा बेगम का मानना है कि बच्चों को किताबी दुनिया से बाहर निकालकर व्यावहारिक जानकारी देना बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने एक सराहनीय पहल की:

  • निजी खर्च पर बस की व्यवस्था: सरकारी फंड का इंतजार किए बिना, खलीदा बेगम ने अपने निजी वेतन से खर्च वहन कर कक्षा तीन से आठवीं तक के 50 बच्चों के लिए बस की व्यवस्था की।

  • ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण: उन्होंने बच्चों को पाकुड़ जिला मुख्यालय के शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाने का बीड़ा उठाया।

  • इन जगहों का किया दौरा: भ्रमण के दौरान बच्चों ने पाकुड़ समाहरणालय (Collectrate), ऐतिहासिक राजबाड़ी और सिदो-कान्हू मुर्मू पार्क का दौरा किया।

प्रशासनिक और ऐतिहासिक ज्ञान से रूबरू हुए बच्चे

इस शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य बच्चों को जिले की प्रशासनिक व्यवस्था और गौरवशाली इतिहास से परिचित कराना था। समाहरणालय में बच्चों ने देखा कि जिला प्रशासन कैसे कार्य करता है, वहीं राजबाड़ी और पार्क में उन्होंने पाकुड़ की सांस्कृतिक विरासत और वीर शहीदों की गाथाओं के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।

“बच्चों के चेहरे की मुस्कान और उनके सीखने की ललक ही मेरी असली पूंजी है। उन्हें व्यावहारिक रूप से चीजों को समझाना शिक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा है।” — खलीदा बेगम, प्रधानाचार्य

पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बना विद्यालय

खलीदा बेगम की यह पहल न केवल अन्य शिक्षकों के लिए एक उदाहरण है, बल्कि यह समाज को भी यह संदेश देती है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो संसाधनों की कमी कभी बाधा नहीं बन सकती। बिना किसी सरकारी सहायता के आयोजित इस दौरे ने बच्चों के ज्ञानवर्धन के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है।

आज मध्य विद्यालय गंगड्डा और उसकी प्रधानाचार्य की यह पहल पूरे पाकुड़ जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है, जो शिक्षा के वास्तविक अर्थ को चरितार्थ कर रही है।

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