पाकुड़ जेल में गूंजी इबादत की गूंज: 50 पुरुष और 2 महिला बंदियों ने रखा रोजा, जेल प्रशासन ने दीं विशेष सुविधाएं

सांप्रदायिक सौहार्द: पाकुड़ जेल में 52 बंदियों ने रखा रोजा, प्रशासन ने किए विशेष इंतजाम।

सुमन कुमार दत्ता (पाकुड़ )

 

पाकुड़। पवित्र रमजान महीने को लेकर जेलों में भी भक्ति और इबादत का माहौल दिख रहा है। पाकुड़ जिला जेल में बंद कैदियों ने सलाखों के पीछे रहते हुए भी अपनी आस्था को अडिग रखा है। शुक्रवार को रमजान के दूसरे दिन जेल के कुल 52 बंदियों ने पूरे अकीदत के साथ रोजा रखा।

बंदियों के लिए प्रशासन की विशेष पहल

जेल प्रशासन ने रोजेदार बंदियों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए उनके लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। जेलर दिलीप कुमार ने बताया कि वर्तमान में जेल में कुल 253 बंदी हैं, जिनमें से 52 बंदियों (50 पुरुष और 2 महिलाएं) ने रोजा रखा है।

रोजेदारों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासन द्वारा निम्नलिखित व्यवस्थाएं की गई हैं:

  • सेहरी और इफ्तार: रोजेदारों के लिए समय पर पौष्टिक आहार सुनिश्चित किया जा रहा है।

  • दूध और फल: शारीरिक शक्ति बनाए रखने के लिए जेल प्रशासन की ओर से दूध, ताजे फल और सूखा राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।

  • जुमे की नमाज: शुक्रवार (जुम्मा) के महत्व को देखते हुए जेल परिसर में ही मौलवी को बुलाकर सामूहिक नमाज अदायगी की व्यवस्था की गई।

समय का विशेष ध्यान

शुक्रवार को इफ्तार का समय संध्या 5:37 बजे निर्धारित किया गया है। जेलर ने यह भी जानकारी दी कि बंदियों को अपनी ओर से भी सूखा राशन रखने की छूट दी गई है, ताकि वे अपनी धार्मिक परंपराओं को सहजता से निभा सकें।

“जेल प्रशासन का प्रयास है कि जेल के भीतर भी बंदी अपने पर्व-त्योहारों को शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण तरीके से मना सकें। इसके लिए सेहरी से लेकर इफ्तार तक की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखा जा रहा है।” — दिलीप कुमार, जेलर

यह पहल न केवल जेल के भीतर अनुशासन बनाए रखने में मदद करती है, बल्कि बंदियों के बीच सकारात्मक सोच और आपसी भाईचारे को भी बढ़ावा देती है।

 

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