दहेज की वेदी पर ‘खाकी’ की सुस्ती: लोहे की रॉड से लहूलुहान विवाहिता न्याय को मोहताज

दहेज की वेदी पर ‘खाकी’ की सुस्ती: लोहे की रॉड से लहूलुहान विवाहिता न्याय को मोहताज

​■ चाकघाट में मानवता शर्मसार: रसूख के आगे नतमस्तक हुआ सिस्टम?

​■ एसपी की चौखट पर पहुंची बिलखती मां, पूछा- “क्या मेरी जान की कोई कीमत नहीं?”

बुलंद सोच ब्यूरो,
/रीवा।एक तरफ सरकार ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ का नारा बुलंद कर रही है, वहीं दूसरी तरफ रीवा के चाकघाट थाना क्षेत्र में एक बेटी को दहेज के लालच में मौत के घाट उतारने की कथित कोशिश की गई। दैनिक बुलंद सोच के पास मौजूद जानकारी के अनुसार, वार्ड क्रमांक-5 की निवासी रश्मि गुप्ता को उसके ही ससुराल वालों ने केवल इसलिए लहूलुहान कर दिया क्योंकि वह उनकी धन-पिपासा को शांत नहीं कर सकी।

क्रूरता की पराकाष्ठा: गर्भावस्था में भी नहीं पसीजा दिल

​पीड़िता का आरोप है कि पति अनुपम केशरवानी और सास संगीता देवी का जुल्म शादी के महज तीन महीने बाद ही शुरू हो गया था। चौंकाने वाला आरोप यह है कि जब रश्मि गर्भवती थी, तब भी उसे शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर घर से बेदखल कर दिया गया। एक मां और एक पत्नी के सम्मान को जिस तरह पैरों तले रौंदा गया, उसने पूरे क्षेत्र की कानून व्यवस्था और सामाजिक सोच पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

सरेराह घसीटा गया, नुकीली रॉड से फोड़ा सिर

​30 मार्च 2026 की वह सुबह किसी दुःस्वप्न से कम नहीं थी। आरोप है कि पति ने विवाद के दौरान लोहे की नुकीली रॉड से रश्मि पर जानलेवा हमला किया, जिससे उसका सिर फट गया। प्रत्यक्षदर्शियों की रूह तब कांप गई जब कथित तौर पर पीड़िता को बालों से पकड़कर घर से बाहर सड़क तक घसीटा गया। सड़क पर बिखरा खून चीख-चीख कर इंसाफ की मांग कर रहा था, लेकिन स्थानीय तंत्र की खामोशी कई संदेहों को जन्म दे रही है।

बुलंद सोच का बड़ा सवाल: पुलिस की भूमिका संदिग्ध क्यों?

​घटना के बाद डायल 112 की सक्रियता से मामला थाने तक तो पहुंचा, लेकिन वहां जो हुआ वह और भी निराशाजनक है। पीड़िता का आरोप है कि पुलिस ने उचित धाराओं में त्वरित कार्रवाई करने के बजाय ढुलमुल रवैया अपनाया। प्रशासन से सीधे सवाल पूछता है:

​क्या किसी प्रभावशाली दबाव के कारण आरोपियों को संरक्षण दिया जा रहा है?

​सरेआम हुई इस हिंसक वारदात के बाद भी अब तक गिरफ्तारी से परहेज क्यों?

​क्या पुलिस किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रही है?

*​इंसाफ की अंतिम आस: अब कप्तान के हाथ में कमान*

​थाने से निराश होकर, अपने मासूम बच्चे को गोद में लिए पीड़िता ने अब रीवा पुलिस अधीक्षक (SP) के द्वार पर दस्तक दी है। उसने अपने गहने हड़पने और जान से मारने की धमकी मिलने की भी शिकायत की है। अब देखना यह होगा कि क्या जिले के आला अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर चाकघाट पुलिस की कार्यप्रणाली को दुरुस्त करते हैं या रश्मि जैसी बेटियां इसी तरह सिस्टम की फाइलों में दबकर रह जाएंगी।

रिपोर्टर 

प्रशांत शुक्ल TN News 24 ✍️ 

7509655674

 

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