कार्बन के कहर से राहत को 9000 तुलसी के पौधे बांटेगा वसुधा क्लाइम केयर फाउंडेशन, ‘मिशन 9000’ शुरू

अर्जुन रौतेला आगरा। शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन से राहत दिलाने के लिए सामाजिक संस्था वसुधा क्लाइम केयर फाउंडेशन ने एक अनूठी पहल शुरू की है। संस्था ‘मिशन 9000’ के तहत 9 हजार तुलसी के पौधों का वितरण करेगी।

बुधवार को संजय प्लेस स्थित होटल मेट्रो में फाउंडेशन की नई कार्यकारिणी की घोषणा और स्वागत समारोह के दौरान इस मिशन का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर अध्यक्ष संगीता दुबे, महासचिव दीपक श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष रेखा सारस्वत, संयुक्त सचिव निहारिका शर्मा, कोषाध्यक्ष विख्यात अग्रवाल, मीडिया प्रभारी मिथिलेश, स्वयंसेवक प्रमुख आश्रय जैन व कार्यकारिणी सदस्य हरीश, डॉ. ए.के. मिश्रा और अनमोल ने तुलसी के पौधों के साथ पोस्टर जारी किया।

संस्था की अध्यक्ष संगीता दुबे ने कहा कि कार्बन मानव का दम घोंट रहा है, इसके प्रति जागरूकता और रोकथाम दोनों जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि एक कार 300 किलोमीटर चलने पर जितना कार्बन उत्सर्जन करती है, उसकी भरपाई के लिए 9000 तुलसी के पौधों की जरूरत होती है। 9000 तुलसी के पौधे करीब 4.5 टन कार्बन उत्सर्जन को रोकने में सक्षम हैं।

महासचिव दीपक श्रीवास्तव ने कहा कि तुलसी सिर्फ एक पौधा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और स्वस्थ साँसों का संगम है। यह अकेला पौधा है जिसे ‘मदर मेडिसिन ऑफ नेचर’ और ‘द क्वीन ऑफ हर्ब्स’ कहा जाता है। यह आसपास की हानिकारक वायु को शुद्ध करता है।

फाउंडेशन ने बताया कि मिशन के प्रथम चरण में वर्ष 2027 में हर माह 1000 पौधों का वितरण किया जाएगा। पूरे वर्ष में 9 से 12 हजार पौधे शहर के मंदिरों, स्कूलों, कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थलों पर लगाए व बांटे जाएंगे।

संयुक्त सचिव निहारिका शर्मा ने बताया कि यह एक कम्युनिटी ड्रिवन पहल है और इसमें सहयोग करने वाले जागरूक नागरिकों को संस्था की ओर से ‘कार्बन योद्धा प्रमाण-पत्र’ दिया जाएगा। उपाध्यक्ष रेखा सारस्वत ने ‘हर साँस तुलसी के नाम’ का संदेश देते हुए कहा कि तुलसी एक शक्तिशाली एडेप्टोजन है जो औद्योगिक प्रदूषण और भारी धातुओं के रासायनिक तनाव से शरीर के अंगों की रक्षा करती है।

अन्य खबरों हेतु संपर्क करें संवाददाता अर्जुन रौतेला 8868868461

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gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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