गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
गुजरात प्रदेश सूरत शहर के टेक्सटाइल उद्योग पर बिजली की महंगाई और कटौती की दोहरी मार
450 मिलों की उत्पादन लागत बढ़ने का दावा, सरकार से नियमित बिजली आपूर्ति और राहत देने की मांग
सूरत: सूरत के टेक्सटाइल प्रोसेसिंग उद्योग में बिजली की बढ़ती लागत और अनियमित बिजली आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है। उद्योग से जुड़े मिल संचालकों के अनुसार, बिजली की दरों में बढ़ोतरी और बार-बार होने वाली बिजली कटौती के कारण उत्पादन लागत में इजाफा हो रहा है, जिससे उद्योग के सामने आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जीतुभाई बखारिया ने कहा कि टेक्सटाइल मिलों के सुचारु संचालन के लिए बिजली की नियमित और निरंतर आपूर्ति बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकार और संबंधित बिजली विभाग से मांग की कि उद्योगों को निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जाए तथा बढ़ती लागत से राहत देने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
मिल संचालकों के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से लागू ईंधन एवं परिवर्तनशील शुल्क (फ्यूल एंड वैरिएबल चार्ज) में बढ़ोतरी के कारण बिजली की लागत में लगभग 60 से 70 पैसे प्रति यूनिट तक वृद्धि होने का दावा किया जा रहा है। इसके चलते लगभग 450 टेक्सटाइल मिलों की उत्पादन लागत प्रभावित होने की बात कही जा रही है। उद्योग से जुड़े लोगों के अनुमान के मुताबिक, कुछ मिलों का मासिक खर्च ₹4 से ₹5 लाख तक बढ़ सकता है।
बिजली कटौती के कारण मशीनों का उत्पादन प्रभावित होता है। ऐसी स्थिति में मिल संचालकों को जनरेटर का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिससे डीजल और संचालन संबंधी खर्च बढ़ जाता है। इससे उत्पादन की समय-सीमा, ऑर्डर की आपूर्ति और उद्योग के मुनाफे पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सूरत का टेक्सटाइल उद्योग शहर की अर्थव्यवस्था और रोजगार का एक महत्वपूर्ण आधार है। इस उद्योग पर पड़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ केवल मिल संचालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि श्रमिकों, व्यापारियों और निर्यात से जुड़े कारोबार पर भी असर डाल सकता है।
*प्रमुख मांगें:*
1. टेक्सटाइल मिलों को नियमित और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
2. बिजली बिल में बढ़ते ईंधन एवं परिवर्तनशील शुल्क की समीक्षा कर उद्योग को राहत दी जाए।
3. बिजली कटौती की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
4. टेक्सटाइल उद्योग की समस्याओं पर चर्चा के लिए सरकार और बिजली विभाग द्वारा उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की जाए।
उद्योग से जुड़े लोगों ने उम्मीद जताई है कि सरकार और संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या पर शीघ्र ध्यान देंगे, ताकि सूरत के टेक्सटाइल उद्योग की उत्पादन क्षमता, रोजगार और प्रतिस्पर्धात्मकता को सुरक्षित रखा जा सके।
नोट:लागत में वृद्धि और प्रभावित मिलों की संख्या से संबंधित आंकड़े उद्योग से जुड़े लोगों के दावों एवं अनुमानों पर आधारित हैं।
टी एन न्यूज़ 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट
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