शिक्षा की दुर्दशा : अन्धेर नगरी चौपट राजा, टके सेर भाजी टके सेर खाजा

आगरा (अर्जुन रौतेला)। एक ओर जहां भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार, शिक्षा को बढ़ावा देने की नई नई योजनाएं जारी कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ खुद सरकारी स्कूलों को इतना उपेक्षित कर दिया गया है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के भविष्य पर किसी का कोई ध्यान नहीं जा रहा है।

पिछले दिनों प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पैरंट्स अवेयरनेस (टीम पापा) के पास एक वोइसनोट में रिकॉर्डिंग आई थी, जिसमे कहा गया था कि किदवई पार्क के पास स्थित महाराजा सूरजमल इंटर कॉलेज की सातवीं कक्षा में पंखे नहीं लगे हुए हैं, पापा संस्था से अनुरोध किया गया था, उन क्लासों में पंखों को लगवा दें, टीम पापा की तरफ़ से जब एक प्रतिनिधिमंडल महाराजा सूरजमल इंटर कॉलेज पहुंचा तो स्थितियां चौंकाने वाली दिख रही थी, जिला उपाध्यक्ष आगरा पुष्पेंद्र सिंह सिकरवार ने जब स्कूल की प्रधानाचार्य श्री सुंदर कौर से बात की तो मालूम हुआ कि स्कूल की लाइट 2010 में ही काटी जा चुकी है लगभग ₹400000 से ज्यादा का बकाया चल रहा है, जिसकी वजह से लाइट नही जोड़ी जा रहा है, तब स्कूल के बच्चे गर्मी में ही पढ रहे हैं। ज्यादा पूछने पर उन्होंने मैनेजमेंट से पूछने की बात कह कर अपनी बात खत्म कर दी।

प्रदेश उपाध्यक्ष राखी सिंह मौके पर टीम के साथ मौजूद थी, उन्होंने आगरा टीम के साथी हरविंदर सिंह के द्वारा स्कूल के प्रांगण व क्लास की वीडियो भी बनवाई, राखी सिंह का कहना था, कि स्कूल में कुल मिलाकर लगभग 80 बच्चों के करीब हैं, जिनके लिए ना बिजली है, ना क्लास रूम के अंदर अच्छी बेंच है, और ना ही खेलने का मैदान, अच्छी व्यवस्था के रूप में मौजूद है बड़ी-बड़ी घास उग चुकी है मैदानों में, इस बात की जानकारी जिला आगरा की टीम के द्वारा राष्ट्रीय संयोजक दीपक सिंह सरीन को दी गई है।

दीपक सिंह सरीन का कहना है कि या तो बच्चों को सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं अथवा स्कूल को किसी अन्य स्थान्तरित किया जाये, वे आगरा लौटते ही इस विषय में संबंधित शिक्षा अधिकारियों से भेंट वार्ता करेंगे माननीय मुख्यमंत्री जी को भी इस बारे में सूचित करेंगे।

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gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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