दिनांक: 26/12/2025 टी यन न्यूज 24 गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
1. माननीय अपर मुख्य सचिव महोदय,
उद्योग एवं खनन विभाग,
पाँचवाँ ब्लॉक, तीसरी मंज़िल,
नया सचिवालय, गांधीनगर – 382010.
2. माननीय आयुक्त महोदय,
खनन एवं खनिज विभाग,
ब्लॉक नं. 15, डॉ. जीवराज मेहता भवन,
सेक्टर-10, गांधीनगर।
गुजरात प्रदेश के सूरत ज़िले में भू-वैज्ञानिक (जियोलॉजिस्ट) कार्यालय में पिछले तीन वर्षों से स्थायी भू-वैज्ञानिक की नियुक्ति न होने से उत्पन्न समस्याओं, शिकायतों की जाँच में हो रही देरी, तथा मिट्टी–रेत जैसे खनिजों की चोरी से सरकार को हो रहे रॉयल्टी नुकसान के संबंध में प्रस्तुति।
उपरोक्त विषय के संदर्भ में निवेदन है कि सूरत ज़िले के भू-वैज्ञानिक कार्यालय में पिछले तीन वर्षों से स्थायी जियोलॉजिकल भू-वैज्ञानिक की नियुक्ति नहीं की गई है। यह कार्यालय केवल प्रभारी जियोलॉजिस्ट के माध्यम से संचालित हो रहा है, जिसके कारण खनिज प्रशासन में गंभीर बाधाएँ और अनियमितताएँ उत्पन्न हो रही हैं। इसके परिणामस्वरूप मिट्टी, रेत जैसे खनिजों की चोरी को खुला अवसर मिल रहा है और सरकार को करोड़ों रुपये की रॉयल्टी का नुकसान हो रहा है।
**इस समस्या के प्रमुख पहलू एवं परिणाम निम्नलिखित हैं:**
सूरत के भू-वैज्ञानिक कार्यालय में कर्मचारियों एवं अधिकारियों की कमी के कारण रॉयल्टी चोरी से संबंधित अनेक शिकायतों की जाँच समय-सीमा में पूर्ण नहीं हो पा रही है। जाँच में अत्यधिक विलंब होता है और कार्रवाई केवल औपचारिक बनकर रह जाती है।• विशेष रूप से सूरत ज़िले के ओलपाड, कामरेज, चोरियासी, बारडोली एवं महुवा जैसे तालुकाओं में अनेक शिकायतें किए जाने के बावजूद नियमानुसार कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कई शिकायतों की जाँच अब तक पूर्ण नहीं हुई है, जिसके कारण अवैध खनन एवं खनिज चोरी निरंतर जारी है।
सूरत में स्थायी भू-वैज्ञानिक जैसे अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण राजनीतिक नेताओं एवं कर्मचारियों के बीच मिलीभगत हो रही है। राजनीतिक संरक्षण प्राप्त कुछ विशेष एजेंसियों को सूरत के सभी तालुकाओं में मिट्टी एवं रेत खनन के टेंडर आवंटित किए जा रहे हैं। ऐसी एजेंसियाँ अवैध खनन एवं चोरी कर सरकार को करोड़ों रुपये की रॉयल्टी आय का नुकसान पहुँचा रही हैं।
• जहाँ मिट्टी एवं रेत चोरी की शिकायतों पर जाँच की जाती भी है, वहाँ केवल नाममात्र की कार्रवाई कर प्रतीकात्मक दंड वसूला जाता है। इससे खनिज माफियाओं को प्रोत्साहन मिलता है और अवैध गतिविधियाँ लगातार बढ़ रही हैं।
• बिल्डरों द्वारा बेसमेंट की अनुमति प्रायः दो मंज़िल तक की ली जाती है, किंतु दो मंज़िल से अधिक खुदाई कर मिट्टी की चोरी की जा रही है। इसकी जाँच एवं कार्रवाई में भी बाधाएँ आ रही हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान होता है तथा सरकार की रॉयल्टी आय में भी आर्थिक क्षति बढ़ती है।
उपरोक्त सभी अनियमितताएँ राज्य के खनिज प्रशासन को कमजोर कर रही हैं, पर्यावरण को हानि पहुँचा रही हैं तथा क़ानून के शासन को चुनौती दे रही हैं। अतः निम्नलिखित माँगों के साथ निवेदन है कि—
• सूरत ज़िले के भू-वैज्ञानिक कार्यालय में तत्काल स्थायी जियोलॉजिस्ट की नियुक्ति की जाए तथा अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती कर व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए।
• मिट्टी एवं रेत से संबंधित शिकायतों की समय-सीमा में नियमानुसार जाँच पूर्ण की जाए तथा लंबित शिकायतों की त्वरित एवं स्वतंत्र जाँच कर कठोर कार्रवाई की जाए, विशेषकर उपर्युक्त तालुकाओं में।
• राजनीतिक संरक्षण प्राप्त तत्वों के विरुद्ध विशेष जाँच एवं कार्रवाई की जाए तथा मिलीभगत के आरोपों की जाँच हेतु विस्तृत ऑडिट कराया जाए।
• रॉयल्टी नुकसान का विस्तृत आकलन कर उसके निवारण हेतु विशेष अभियान चलाया जाए और अवैध खनन पर कठोर नियंत्रण लगाया जाए।
बेसमेंट की अनुमति दिए जाने के बाद प्रायः स्थल निरीक्षण नहीं किया जाता। अतः मिट्टी चोरी रोकने हेतु अनुमति के बाद विशेष टीम गठित की जाए तथा स्वीकृत सीमा से अधिक खुदाई करने वालों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई की जाए।
उपरोक्त प्रस्तुति पर लोकहित में तत्काल ध्यान देकर आवश्यक कार्रवाई करने की विनती है, ताकि खनिज चोरी पर रोक लगे, खनिज प्रशासन अधिक प्रभावी बने, सरकारी राजस्व में वृद्धि हो तथा क़ानून का पालन सुनिश्चित हो।
टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419
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