गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
गुजरात प्रदेश सुरत शहर के पांडेसरा GIDC क्षेत्र में स्थित न्यू पारस डाइंग मिल में कुछ दिन पूर्व केमिकल टंकी की सफाई के दौरान जहरीली गैस के कारण 3 श्रमिकों की मृत्यु हो गई तथा कुछ श्रमिक बेहोश हो गए, ऐसी जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आई है। यह घटना अत्यंत गंभीर और इससे श्रमिकों के जीवन के प्रति घोर लापरवाही स्पष्ट दिखाई देती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मिल परिसर में स्थित केमिकल टंकी की सफाई के दौरान श्रमिकों को कन्फाइंड स्पेस (सीमित स्थान) में उतारा गया था, जहाँ जहरीली गैस की उपस्थिति की पूरी संभावना थी। इसके बावजूद श्रमिकों को उचित सुरक्षा उपकरण, गैस डिटेक्शन सिस्टम, ऑक्सीजन सपोर्ट या अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई थी।
घटना के संबंध में पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR के अनुसार केवल कॉन्ट्रैक्टर के विरुद्ध ही कार्रवाई की गई है। किंतु इस पूरी घटना के लिए केवल कॉन्ट्रैक्टर ही जिम्मेदार नहीं है। मिल के मालिक, ऑक्यूपायर, डायरेक्टर तथा मैनेजमेंट पर कानूनन श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की प्राथमिक और प्रत्यक्ष जिम्मेदारी होती है। विशेषकर जोखिमपूर्ण केमिकल प्रक्रियाओं से संबंधित फैक्टरी में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से फैक्टरी के ऑक्यूपायर और मैनेजमेंट की होती है, न कि केवल कॉन्ट्रैक्टर की।
Factories Act, 1948 की धारा 7A के अनुसार फैक्टरी के मालिक पर कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करने की कानूनी जिम्मेदारी होती है। इसके अतिरिक्त धारा 41B और 41C के अंतर्गत जोखिमपूर्ण प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं को बनाए रखने की स्पष्ट जिम्मेदारी निर्धारित की गई है। इन कानूनी दायित्वों का पालन न किए जाने के कारण श्रमिकों के जीवन को खतरा उत्पन्न हुआ और 3 श्रमिकों की मृत्यु की दुखद घटना सामने आई।
इस घटना में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की गंभीर आपराधिक धाराएँ भी लागू होती हैं। लापरवाही के कारण हुई मृत्यु के लिए धारा 106, खतरनाक पदार्थों से संबंधित लापरवाही के लिए धारा 287, तथा मानव जीवन को जोखिम में डालने के लिए धारा 125 लागू होती हैं। इसके अतिरिक्त फैक्टरी में सुरक्षा व्यवस्था के अभाव के कारण Factories Act की धारा 92 के अंतर्गत भी आपराधिक दायित्व बनता है।
इस प्रकार यह स्पष्ट है कि पुलिस द्वारा केवल कॉन्ट्रैक्टर के विरुद्ध FIR दर्ज करना और मिल मालिकों, ऑक्यूपायर तथा मैनेजमेंट की भूमिका की जांच किए बिना उन्हें जिम्मेदारी से बाहर रखना उचित नहीं है। ऐसे गंभीर मामलों में सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है। सूरत जिले में इस प्रकार की घटनाएँ बार-बार सामने आती रही हैं, फिर भी फैक्टरी मालिकों के विरुद्ध कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाती, जिसके कारण वे लगातार कानूनों का उल्लंघन करते रहते हैं।
अतः आपसे निवेदन है कि उपरोक्त घटना की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR में मिल के मालिकों, ऑक्यूपायर, डायरेक्टर्स तथा जिम्मेदार मैनेजमेंट अधिकारियों को भी आरोपी के रूप में शामिल किया जाए। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कर सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध लागू होने वाली गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत कठोर कार्रवाई की जाए। यह घटना मात्र एक दुर्घटना नहीं बल्कि श्रमिकों के जीवन के प्रति गंभीर लापरवाही का परिणाम है। इसलिए मृतक श्रमिकों के परिवारों को न्याय दिलाने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए त्वरित और कठोर कार्रवाई आवश्यक है।
उपरोक्त तथ्यों के आधार पर हमारी निम्नलिखित मांगें और प्रस्तुतियाँ हैं:
1. इस भूमिगत टंकी में कौन-सा केमिकल भरा हुआ था, इसका उल्लेख फैक्टरी इंस्पेक्टर द्वारा जारी प्रमाणपत्र में है या नहीं, इसकी जांच कराई जाए।
2. फैक्टरी इंस्पेक्टर तथा अन्य सक्षम प्राधिकरणों द्वारा डाइंग कार्य हेतु कितनी मशीनों को अनुमति दी गई है और कितनी मशीनें बिना अनुमति के चलाई जा रही हैं, इसकी भी विस्तृत जांच कराई जाए।
3. गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा इस भूमिगत टंकी का निरीक्षण किया गया है या नहीं, अथवा मिल मालिकों द्वारा इस टंकी की जानकारी GPCB से छिपाई गई है, या इस संबंध में GPCB के पास कोई रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं – इसकी भी उचित जांच कराई जाए।
4. 3 मृतक श्रमिकों को बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के भूमिगत टंकी में क्यों उतारा गया, इसकी जांच की जाए।
5. किसी भी प्रकार के सुरक्षा उपकरणों के बिना इन श्रमिकों को टंकी में उतारने के कारण जहरीली गैस से उनका दम घुटने से मृत्यु हुई। किंतु पॉलसाणा पुलिस द्वारा केवल न्यू पारस मिल के कॉन्ट्रैक्टर के विरुद्ध ही मामला दर्ज किया गया है। जबकि इन श्रमिकों की मृत्यु के लिए मिल के मालिक सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। अतः हमारी मांग है कि न्यू पारस मिल के मालिकों के विरुद्ध भी संबंधित आपराधिक धाराओं के तहत FIR दर्ज करने के निर्देश उच्च स्तर से दिए जाएँ।
6. Factories Act, 1948 की धारा 36(1) और 36(2) के अनुसार किसी भी व्यक्ति को ऐसी सीमित जगह (टैंक, चैंबर, गड्ढा, पाइप आदि) में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है जहाँ जहरीली गैस, धुआँ या वाष्प की संभावना हो, जब तक कि सुरक्षा के सभी आवश्यक उपाय न किए गए हों और सक्षम व्यक्ति द्वारा परीक्षण कर लिखित प्रमाणपत्र जारी न किया गया हो।
स्पष्ट है कि कंपनी के मालिकों द्वारा फैक्टरी अधिनियम की इन कानूनी प्रावधानों का खुला उल्लंघन किया गया है। अतः इस संबंध में भी उचित कार्रवाई करते हुए कंपनी मालिकों को जिम्मेदार ठहराया जाए और न्यायहित में आवश्यक कदम उठाए जाएँ।
अतः उपरोक्त मांगों और तथ्यों के आधार पर आपसे अपेक्षा है कि इस मामले में तत्काल प्रभाव से उचित और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
१ गृह राज्य मंत्री श्री हर्ष भाई संघवी गांधीनगर
२ माननीय निर्देश औद्योगिक एवं स्वास्थ्य विभाग गांधीनगर
३ माननीय जिला कलेक्टर सूरत शहर
४ माननीय लेबर कमिश्नर गांधीनगर
५ माननीय अध्यक्ष गुजरात प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड गांधीनगर माननीय
६ प्रादेशिक अधिकारी श्री गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सूरत पांडेसरा
७ माननीय नायाब लेबर कमिश्नर सूरत
से आग्रह पूर्वक अपील वकील एवम् गुजरात प्रदेश कांग्रेस महा मंत्री श्री दर्शन कुमार ए नायक ने की है
टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419
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