“त्यौंथर में अनाज की लाशों पर सिस्टम की दावत, हजारों क्विंटल गेहूं बारिश में हो रहा खराब, जिम्मेदारों के मौन पर खड़ा हो रहा सवाल”💥
त्यौंथर के गेहूं खरीदी केंद्र इस वक्त बदइंतजामी नहीं, बल्कि खुलेआम लूट और लापरवाही के अड्डे बन चुके हैं। मौसम विभाग कई दिनों से बारिश का अलर्ट देता रहा, लेकिन समिति प्रबंधकों ने जैसे कसम खा रखी थी कि न तो कोई इंतजाम करेंगे और न ही किसानों की मेहनत को बचाएंगे। सूत्रों की माने तो हजारों क्विंटल गेहूं खुले आसमान के नीचे भीगकर सड़ गया और जिम्मेदार तमाशा देखते रहे।
ये सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित अपराध है। तिरपाल तक की व्यवस्था नहीं करना, भंडारण के नाम पर शून्य इंतजाम रखना—यह साफ संकेत देता है कि या तो सिस्टम पूरी तरह फेल है या फिर जानबूझकर किसानों और सरकार दोनों को चूना लगाया जा रहा है। किसानों का खून-पसीना पानी में बह गया, लेकिन अफसरों के चेहरे पर शिकन तक नहीं।
हैरानी की बात यह है कि बार-बार खबरों के माध्यम से जानकारी देने बावजूद भी जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई नहीं होती। इससे साफ जाहिर होता है कि नीचे से ऊपर तक मिलीभगत का मजबूत खेल चल रहा है। यही वजह है कि ऐसे लापरवाह प्रबंधकों के हौसले आसमान पर हैं।
सूत्र बताते हैं कि त्यौंथर के अमिलिया, सोनौरी,रायपुर,ढखरा,मागी,मंडी चाकघाट चंदपुर,अतरैला 1 एवं 2,मनिका और परसिया जैसे कई खरीदी केंद्रों में मौसम के खराबी की वजह से हजारों बोरिया गेहूं खराब हो गई है ऐसे में अब सवाल सीधा है— की ऐसे भीगे हुए गेहूं की भरपाई समिति प्रबंधकों स्वयं के व्यय से करेंगे या फिर किसानों की जेब से भरपाई कराएंगे सवाल यह भी है क्या खरीदी केंद्र किसानों के हित के लिए हैं या भ्रष्टाचार की दुकान चलाने के लिए? क्या शासन का पैसा और किसानों का अनाज यूं ही सड़ता रहेगा और जिम्मेदार अपनी कुर्सियों पर बैठे मलाई काटते रहेंगे?
अब यह तो वरिष्ठ अधिकारी ही तय करेंगे कि कार्रवाई होगी या फिर इसी तरह अनाज सड़ेगा, किसान रोएगा और सिस्टम मौन रहेगा?

रिपोर्टर
प्रशांत शुक्ल TN News 24 ✍️
7509655674
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