अर्जुन रौतेला आगरा। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में साहित्य साधिका समिति, आगरा की ओर से सेठ पदमचंद जैन प्रबंध संस्थान, खंदारी के वातानुकूलित सभागार में भव्य साहित्य साधिका सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करते हुए हिंदी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार का संदेश दिया गया।

समारोह में मथुरा से पधारीं कवयित्री रेनू उपाध्याय को उनके साहित्यिक योगदान के लिए ‘साहित्य साधिका सम्मान-2026’ से अलंकृत किया गया। वहीं इटावा की डॉ. मंजू यादव ‘मृदुल’ को शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘सुधी शिक्षक सम्मान-2026’ प्रदान किया गया। सम्मान प्राप्त करने वाली दोनों साहित्यिक प्रतिभाओं के प्रति उपस्थित साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों ने बधाई एवं शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

कार्यक्रम का शुभारंभ समिति की संरक्षिका कमलेश त्रिवेदी, संस्थापिका डॉ. सुषमा सिंह, रमा वर्मा श्याम, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राजेन्द्र मिलन, अध्यक्ष डॉ. रेखा कक्कड़ एवं सचिव डॉ. यशोधरा यादव ‘यशो’ ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।

सुधी शिक्षक सम्मान से सम्मानित डॉ. मंजू यादव ‘मृदुल’ ने अपने संबोधन में आगरा की ऐतिहासिक एवं साहित्यिक धरती को नमन करते हुए कहा कि शिक्षक की डांट भी विद्यार्थी के लिए शुभाशीष होती है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों को निरंतर मार्गदर्शन देकर उन्हें सफलता के लिए तैयार करता है और विद्यार्थी की सफलता से गुरु स्वयं गौरवान्वित महसूस करता है। उन्होंने हिंदी के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि “हिंदी मेरी मां है, मेरी रोजी-रोटी है।” उनके भावपूर्ण संबोधन ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

इस अवसर पर डॉ. नीलम भटनागर ने हिंदी भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। उत्तर प्रदेश लेखिका मंच की अध्यक्ष राजश्री यादव ने शिक्षा की भूमिका और समाज निर्माण में उसके महत्व पर विचार रखे। हिंदी दिवस के अवसर पर सुशील सरित ने ‘वंदे मातरम्’ और उसके हिंदी रूपांतरण का गायन प्रस्तुत किया।

समारोह में आचार्य उमाशंकर पाराशर, साधना वैध, अंशू, मंजू यादव ‘ग्रामीण’, डॉ. ममता भारती, चारु मित्रा, मीरा परिहार, राजश्री यादव एवं डॉ. नीलम भटनागर सहित अन्य साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं की प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। रचनाओं और काव्य प्रस्तुतियों के माध्यम से मातृभाषा हिंदी के संरक्षण, संवर्धन और जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।

समारोह में साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों में खासा उत्साह दिखाई दिया। वक्ताओं ने कहा कि साहित्य केवल समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि उसे दिशा देने का सशक्त माध्यम भी है। हिंदी को समृद्ध बनाने के लिए साहित्यकारों और नई पीढ़ी को निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता है।
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