लिग्नाइट खदान प्रोजैक्ट के विरोध को लेकर आज माड़वी तालुका के बोधन गांव हुआ बैठक का आयोजन

मांडवी तालुका के बौधान गांव में बैठक

 

लिग्नाइट खदान प्रोजेक्ट के खिलाफ जोरदार विरोध

बैठक में घला, मुंजलाव, रोसवाड़, बौधान गांव के प्रभावित लोग उपस्थित रहे और एक स्वर में विरोध दर्ज कराया, प्रोजेक्ट रोकने की उठी मांग।

सूरत, ता. 20 :

सूरत जिले के मांडवी तालुका के तीन गांव और कामरेज तालुका के एक गांव (घला, मुंजलाव, रोसवाड़, बौधान) सहित कुल चार गांवों में लिग्नाइट खदान आने वाली है। खासकर, मांडवी का मुंजलाव गांव पूरा का पूरा प्रोजेक्ट में समा जाएगा। इससे स्थानीय लोग असमंजस में हैं। अब इस प्रोजेक्ट के खिलाफ स्थानीय लोगों ने संघर्ष का बिगुल बजाने का निश्चय किया है। गुजरात किसान समाज के नेतृत्व में स्थानीयों ने लड़ाई की तैयारी शुरू कर दी है। शुक्रवार की देर शाम पहली बैठक मांडवी तालुका के बौधान गांव में हुई जिसमें 300 से अधिक लोग मौजूद रहे।

 

बैठक में इस बात पर चर्चा की गई कि किस प्रकार इस प्रोजेक्ट को रोका जा सकता है। बैठक स्थल पर मांडवी पुलिस की ओर से कड़ा बंदोबस्त रखा गया था। इस अवसर पर दक्षिण गुजरात किसान समाज के अध्यक्ष रमेश पटेल ने कहा कि इन पांच गांवों की करीब 6800 बीघा खेती की जमीन प्रोजेक्ट में जाएगी और मांडवी तालुका का मुंजलाव गांव पूरा का पूरा इसमें समा जाएगा। इसलिए स्थानीय लोगों को संगठित होना पड़ेगा, तभी प्रोजेक्ट को रोका जा सकता है।

 

इस मौके पर सहकारी और किसान नेता दर्शन नायक ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से स्थानीय ग्रामीणों और किसानों को बड़ा नुकसान होगा। आने वाले दिनों में गांव की संस्कृति कैसे बचेगी, जमीन उपजाऊ कैसे बनी रहेगी और किसानों को नुकसान न हो, इस दिशा में हमें आगे बढ़ना चाहिए। अगर यह प्रोजेक्ट रोकना है तो स्थानीय लोगों को पक्ष और विपक्ष से ऊपर उठकर एक मंच पर आकर एक स्वर में विरोध करना होगा।

 

इस अवसर पर गुजरात किसान समाज के अध्यक्ष जयेश पटेल ने बताया कि जिले के घला, मुंजलाव, रोसवाड़ और बौधान गांवों में कुल 1600 हेक्टेयर जमीन में लिग्नाइट खदान खोदने का जीएमडीसी का प्रस्ताव है। इसके लिए हयात तडकेश्वर खान से शुरू करके तापी नदी के किनारे तक 16 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में खान खोदी जाएगी। काकरापार दाहिने किनारे की मुख्य नहर इस प्रोजेक्ट के उत्तरी हिस्से में है। खदान ब्लॉक के एक भाग में यह नहर आने से इसे डायवर्ट किया जाएगा। खदान क्षेत्र में आने वाले मार्गों को भी डायवर्ट करना होगा।

 

खदान की उत्पादन क्षमता 1.0 मिलियन टन (10 लाख टन) प्रति वर्ष लिग्नाइट की होगी। पूरे प्रोजेक्ट में कुल 100 लोगों को स्थायी और 300 लोगों को कांट्रैक्ट पर मिलाकर 400 लोगों को रोजगार मिलेगा। लेकिन, घला, मुंजलाव, रोसवाड़, बौधान – कुल 4 गांवों के 2943 परिवार और 13,974 लोग प्रभावित होंगे। मुंजलाव गांव को पूरी तरह खाली कर प्रोजेक्ट के लिए देना पड़ेगा।

 

खदान के कुल 1600 हेक्टेयर क्षेत्र में अभी 42 हेक्टेयर में आवासीय क्षेत्र है। इस जीएमडीसी लिग्नाइट माइनिंग प्रोजेक्ट की कुल लागत 2,567 करोड़ रुपये है। 1600 हेक्टेयर में से 526.71 हेक्टेयर में पेड़ लगाए जाएंगे। पहले चरण में 1600 हेक्टेयर में से 776 हेक्टेयर में लिग्नाइट की खुदाई की जाएगी। किसानों की निजी जमीन अधिग्रहित करने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया की जाएगी।

 

यह खनन कार्य वर्ष 2026-27 से शुरू होकर 2054-55 तक चलेगा और वर्ष 2057-58 में खदान बंद कर दी जाएगी। खदान की आयु 30 वर्ष से अधिक रहेगी। 72% कोल रिकवरी के साथ 85-160 मीटर गहराई तक खदान खोदी जाएगी।

 

इस बैठक में किसान समाज के महामंत्री महेन्द्रसिंह करमरिया, डिप्टी सरपंच साजिद पीरभाई, मुंजलाव के रमेश वसावा, कामरेज तालुका पंचायत के कार्यकारी अध्यक्ष महेश पटेल, रमेशभाई रोसवाड़, पूर्व सरपंच मनहर राठौड़, हनीफभाई, कामरेज केला मंडली के सिराजभाई, रमेशभाई ओसवाल समेत प्रभावित चार गांवों के बड़ी संख्या में लोग जुड़े।

लि.

रमेशभाई पटेल (ओरमा)

अध्यक्ष,

दक्षिण गुजरात किसान समाज

टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्मके खिलाफ सूरत से संवाददाता राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419

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