फतेहपुर सीकरी सुलाह कुल की नगरी में बसंत पंचमी के अवसर पर हुरमत शैख़ शैख़ सलीम चिस्ती के मजार और आस्ताना परिसर में विशेष आयोजन किया गया। परिसर को पीले फूलों से सजाया गया। जहां अकीदतमंदों ने गुलपोशी और चादरपोशी कर दुआएं मांगी।

मजार पर बसंत पंचमी मनाने की अमीर खुसरो की ‘सकल बन फूल रही सरसों’ की गजल के साथ पीले वस्त्र, पीले फूल (गेंदा), और पीली चादरें प्रमुख होती हैं, जिसमें हिंदू-मुस्लिम भाईचारे का संदेश होता है, और कव्वाली होती है, जहाँ लोग सरसों के फूल लेकर आते हैं और प्रसाद चढ़ाते हैं, जो निजामुद्दीन दरगाह पर सदियों से चली आ रही परंपरा है।

फतेहपुर सीकरी में स्थित मज़ार हज़रत शैख़ सलीम चिस्ती के बेटे बाले मियां सरकार के उर्स के मौके पर बड़े हर्स के साथ बसंत पंचमी मनाई गई। बसंत के रंग में रंगी हजरत सलीम चिश्ती की दरगाह वाले मियां का मनाया उर्स सूफी संत हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह में वसंत पंचमी के त्योहार पर सरसों के पीले फूल बड़ी अकीदत के साथ चढ़ाये गए। दरगाह के ख़ुददांम एवं अकीदतमंद पीले रंग के वस्त्र पहने हुए थे। दरगाह के सज्जादानशी पीरजादा अरशद फरीदी की मौजूदगी में लोगों को अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त दास्तानगो सय्यद साहिल आगा ने तूतिया-ए-हिंद अमीर खुसरो के सूफियाना बसंत के महत्व को बसंत के रंग के साथ प्रस्तुत किया। अमीर खुसरो द्वारा शुरू की गई बसंत की परंपरा भारतीय संस्कृति, गंगा जमुनी तहजीब का खूबसूरत हिस्सा है।

सज्जादानशी पीरजादा अरशद फरीदी ने कहा हमारे सूफी संतों ने संगीत व कविता को नई दिशा दी,व हिंदू मुस्लिम संस्कृतियों को जोड़ने वाले त्योहारों को भी अपनाया है। आज ही सूफी संत हजरत शेख सलीम चिश्ती के साहबजादे हजरत ताजुद्दीन चिश्ती उर्फ वाले मियां का सालाना उर्स बड़ी अकीदत के साथ मनाया। हजरत वाले मियां की मजार शरीफ पर चंदन इत्र संदल, केवड़ा एवं फूलों की चादर पेश की गई। हजरत शेख सलीम चिश्ती की दरगाह के सज्जादानशी पीरजादा अरशद फरीदी ने देश में अमन चैन , खुशहाली एवं तरक्की के लिए दुआ की गई। दूरदर्शन की सादियां अलीम, पत्रकार अली आदिल ख़ान व सैकड़ो लोगों द्वारा जियारत की गई।
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