*”पंडित” शब्द विद्वता का प्रतीक है, उपहास का नहीं- विधायक राज प्रसाद उपाध्याय*
‼️उत्तर प्रदेश पुलिस सब – इंस्पेक्टर(SI) भर्ती परीक्षा के हिंदी खंड में (14 मार्च 2026) एक ऐसा प्रश्न देखने को मिला, जिसने न केवल परीक्षा की शुचिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि एक पूरे समाज की भावनाओं को गहरे स्तर पर आहत किया है।
प्रश्न पूछा गया: “अवसर के अनुसार बदल जाने वाले के लिए एक शब्द चुनें”
विकल्प दिए गए: पंडित, अवसरवादी, निष्कपट, सदाचारी।
यह विकल्प चयन मात्र एक ‘लिपिकीय त्रुटि’ नहीं हो सकती।
*”पंडित” जैसे गरिमामयी शब्द को, जो ज्ञान और विद्वता का पर्याय है, “अवसरवादिता” जैसे नकारात्मक अर्थ के साथ जोड़ना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण,* अशोभनीय और विद्वेषपूर्ण है।
और सरकारी परीक्षाओं के माध्यम से युवाओं के मन में इस तरह के भ्रामक और अपमानजनक विचार डालना शैक्षणिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़ी लापरवाही है।
*यह कृत्य प्रदेश सरकार की छवि को धूमिल करने और जातीय तनाव पैदा करने का प्रयास है।* हम इस प्रश्न को आधिकारिक रूप से खारिज करने और भविष्य में ऐसी त्रुटियों पर पूर्ण रोक लगाने की मांग करते हैं।
मुख्यमंत्री जी से सविनय निवेदन है कि इस तरह के गैर-जिम्मेदार और समाज को तोड़ने वाले लोगों पर जोरदार दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि सरकार की मंशा स्पष्ट हो जाए। दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए‼️मनोज त्रिपाठी l
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