गुजरात प्रदेश सरकार का आयोजन या दिखावा आम आदमी का सवाल

गुजरात प्रदेश हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट

मौत के बाद ही क्यों जागता है गुजरात का तंत्र?

दिखावे की कार्रवाई नहीं, स्थायी कार्रवाई और जवाबदेही तय हो: जनहित में गंभीर सवाल

गुजरात: राज्य में बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जिनमें लोगों की जान जाने या गंभीर हादसा होने के बाद ही संबंधित विभागों द्वारा कार्रवाई शुरू की जाती है। इससे यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि प्रशासन और संबंधित तंत्र पहले से सतर्क होकर कार्रवाई क्यों नहीं करता?

जब फूड पॉइजनिंग के कारण लोगों की जान जाती है, तभी होटल और खान-पान की जगहों के खिलाफ जांच एवं कार्रवाई शुरू होती है। जब कोई बड़ा हादसा होता है, तभी फायर सेफ्टी, एनओसी और सुरक्षा नियमों की जांच याद आती है। इसी तरह नकली शराब के कारण लोगों की मौत होने के बाद ही कुछ समय के लिए प्रोहिबिशन ड्राइव तेज कर दी जाती है।

सवाल यह है कि क्या प्रशासनिक कार्रवाई किसी व्यक्ति की मौत या गंभीर हादसे के बाद ही शुरू होनी चाहिए?

जनता का हित इसी में है कि संबंधित विभागों द्वारा होटल, खाद्य प्रतिष्ठानों, औद्योगिक इकाइयों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर नियमित एवं निष्पक्ष जांच की जाए। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर समय रहते कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति की जान जाने के बाद कार्रवाई करने की नौबत ही न आए।

अक्सर किसी घटना के बाद कुछ दिनों तक छापेमारी, जांच और कार्रवाई का माहौल दिखाई देता है, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति फिर पहले जैसी हो जाती है। ऐसी कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित न रहे, बल्कि स्थायी निगरानी, नियमित निरीक्षण और स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

जनहित में अब यह भी आवश्यक है कि संबंधित विभाग यह स्पष्ट करें कि नियमों के उल्लंघन के खिलाफ नियमित निगरानी क्यों नहीं रखी जाती? यदि किसी प्रतिष्ठान या संस्था द्वारा सुरक्षा एवं कानूनी नियमों की अनदेखी की जाती है, तो दुर्घटना होने का इंतजार किए बिना कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?

समय रहते जांच और कड़ी कार्रवाई से कई गंभीर घटनाओं को रोका जा सकता है। इसलिए गुजरात सरकार और संबंधित विभागों से मांग है कि केवल हादसों और मौतों के बाद औपचारिक कार्रवाई करने के बजाय पूर्व-निवारक व्यवस्था को मजबूत किया जाए और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं संस्थाओं की जवाबदेही तय की जाए।

जनहित में सवाल साफ है—मौत के बाद जागने वाली व्यवस्था नहीं, मौत से पहले सतर्क रहने वाला प्रशासन चाहिए।

टी एन न्यूज़ 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट

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