हर साल 20% टैक्स वृद्धि से गरीब और मध्यम वर्ग बेहाल; सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने दी कोर्ट जाने की चेतावनी
पाकुड़। पाकुड़ नगर परिषद क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे होल्डिंग टैक्स को लेकर स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है। आम नागरिकों की इस गंभीर समस्या को उठाते हुए प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने नगर परिषद की अध्यक्ष महोदया को एक पत्र सौंपकर इस पर यथाशीघ्र संज्ञान लेने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि टैक्स के इस आर्थिक बोझ से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
चुनी हुई सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं: सुरेश अग्रवाल
अध्यक्ष को संबोधित करते हुए सुरेश अग्रवाल ने कहा कि पाकुड़ की जनता ने उन्हें एक जनप्रतिनिधि के रूप में चुनकर नगर परिषद की कमान सौंपी थी। जनता को यह उम्मीद कतई नहीं थी कि उनके द्वारा चुनी गई प्रतिनिधि ही उन पर इस तरह का भारी आर्थिक बोझ डालेंगी। वर्तमान समय में जब महंगाई और बेरोजगारी के कारण आम आदमी के लिए परिवार का भरण-पोषण करना ही कठिन हो गया है, ऐसे में हर साल होल्डिंग टैक्स बढ़ाना पूरी तरह से जनहित के विपरीत है।
किस नियम के तहत हो रही है 20% की सालाना वृद्धि?
पत्र के माध्यम से नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि प्रतिवर्ष होल्डिंग टैक्स में लगभग 20% की बढ़ोतरी की जा रही है, जो समझ से परे है। उन्होंने मांग की है कि नगर परिषद जनता के सामने यह स्पष्ट करे कि आखिर किस नियम, प्रावधान या अधिनियम के तहत हर साल इतनी भारी वृद्धि की जा रही है।
“नगर परिषद का मुख्य उद्देश्य जनता को राहत और नागरिक सुविधाएं प्रदान करना होना चाहिए, न कि उन पर टैक्स का बोझ लादकर उन्हें मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित करना।” – सुरेश अग्रवाल, सामाजिक कार्यकर्ता
मांग पूरी न होने पर ‘न्यायालय’ जाने की चेतावनी
सुरेश अग्रवाल ने अध्यक्ष महोदया से विनम्र अनुरोध किया है कि वे इस 20% वार्षिक वृद्धि के फैसले पर तत्काल पुनर्विचार करें और गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत देने के लिए जरूरी कदम उठाएं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि जनहित में इस विषय पर शीघ्र और उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो मजबूर होकर पाकुड़ की आम जनता को न्याय के लिए न्यायालय और माननीय उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेनी पड़ेगी।
अब देखना यह है कि नगर परिषद प्रशासन और अध्यक्ष महोदया जनता के इस तीखे आक्रोश पर क्या रुख अपनाती हैं और उन्हें राहत देने के लिए क्या कदम उठाती हैं।

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