गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
सूरत पुलिस कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली पर गुजरात हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, बिल्डर को भी जारी किया नोटिस
सूरत, 30 जून। गुजरात हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान सूरत पुलिस कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराज़गी व्यक्त करते हुए कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि यदि कानून लागू करने वाली एजेंसी ही समय पर कार्रवाई नहीं करेगी तो आम नागरिकों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास प्रभावित होगा।
सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि शिकायत दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने लगभग 16 दिनों तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। इस पर हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए डीसीपी कार्यालय की भूमिका को लेकर भी जवाब मांगा।
याचिकाकर्ता की ओर से यह आरोप लगाया गया कि मामले में बिल्डर और पुलिस के बीच कथित मिलीभगत के कारण कार्रवाई में देरी हुई। इस पर हाईकोर्ट ने संबंधित बिल्डर को भी नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी शिकायत में यदि प्रथम दृष्टया आपराधिक तत्व दिखाई देते हैं तो पुलिस का दायित्व है कि वह निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करे। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
इस मामले को लेकर सूरत पुलिस कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई और पुलिस प्रशासन द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब पर टिकी है
टी एन न्यूज़ 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट
Updated Video





Subscribe to my channel




