संवाददाता अर्जुन रौतेला आगरा। हिंदी साहित्य व ब्रजभाषा के लिए समर्पित देश की ख्यातिलब्ध संस्था ‘ब्रजभाषा काव्य मंच’ के तत्वावधान में इटावा निवासी युवा साहित्यकार पार्थ ‘सारथी’ की तीन पुस्तकों ‘मेरा अस्तित्व हो तुम’ – काव्य संग्रह, ‘सत्यबोधनम्’ – संस्कृत भाषा में (हिन्दी अनुवाद सहित) नाटक एवं ‘आँसुओं के शब्द’ – एकांकी नाटक का लोकार्पण यूथ हॉस्टल संजय प्लेस आगरा में किया गया। समारोह का शुभारंभ मां शारदे के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया, सरस्वती वंदना बाल संगीतकार उत्कर्ष तिवारी ने की। समारोह के विशिष्ट अतिथि आरबीएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. विजय श्रीवास्तपार्थ ‘सारथी’ का साहित्याकाश में चमकना तय – व ने पार्थ की सृजनशीलता से अभिभूत होकर कहा कि यह उसके पूर्व जन्मों के संस्कारों का प्रतिफल है।

मुख्य अतिथि आगरा पब्लिक स्कूल ग्रुप के अध्यक्ष महेश शर्मा ने कहा कि मैं पार्थ की प्रतिभा से अभिभूत हूं कोविड के समय का सदुपयोग कर उसने हिंदी व संस्कृत भाषाओं में साहित्य सृजन कर डाला, उसकी कल्पनाशीलता, विचारशीलता और भाषा पर अधिकार की मैं प्रशंसा करता हूं। आचार्य उमाशंकर पाराशर ने पार्थ की कृति ‘सत्य बोधानम्’ को अद्भुत कृति बताते हुए कहा कि विश्वास नहीं होता कि इतनी अल्प आयु के युवक ने इस कृति की रचना की है। कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी विद्यापीठ में संस्कृत की विभागाध्यक्ष डाॅ. वर्षा रानी ने कहा कि वह अर्जुन (पार्थ) तो पहले ही हैं कृष्ण को ‘सारथी’ बनाकर चलते हैं। नाटक में रूमानी संवाद अत्यंत रोचक हैं। आर एस तिवारी ‘शिखरेश’ ने ‘आंसुओं के शब्द’ पुस्तक के बारे में बताया कि इसमें बुद्ध दर्शन को बहुत सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया है एकांकी में अष्टांग मार्ग का दार्शनिक विवेचन बहुत अच्छा किया है।

आरबीएस कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉक्टर सुषमा सिंह ने पर्थ के विषय में बताया कि पार्थ ने कृष्ण कन्हैया को अपना सारथी ही नहीं बनाया जीवन का हर क्षण कृष्ण के नाम कर दिया है। इटावा की प्रख्यात शिल्पी मीरा पुरवार ने बताया की पार्थ ने 4 वर्ष की उम्र में गणेश वंदना संस्कृत में शुद्धरूप में प्रस्तुत की तभी पूत के पांव पालने में दिखाई दे गए थे। समारोह की अध्यक्षता कर रहे कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी विद्यापीठ के पूर्व निदेशक डॉ जय सिंह ‘नीरद’ ने पार्थ को आशीर्वाद देते हुए कहा कि उन्हें प्रशंसा से प्रेरणा लेनी चाहिए सभ्यता के आवरण जितने बढ़ते जाएंगे कवियों के लिए उतनी ही चुनौतियां बढ़ती जाएगी। पूर्व प्रशासनिक अधिकारी यादराम सिंह ‘कवि किंकर’, बुलंदशहर के कवि व साहित्यकार देवेंद्र देव मिर्जापुरी, वृद्धजन सम्मान समिति अंतरराष्ट्रीय के सह- संस्थापक गिरीश चंद्र गुप्त सहित अनेक साहित्यकारों ने भी पार्थ ‘सारथी’ को शुभकामनाएं व आशीर्वाद दिया।

पार्थ ‘सारथी’ ने अपनी सृजनशीलता का श्रेय अपनी माँ बविता एवं नानी प्रख्यात शिल्पकार मीरा पुरवार को देते हुए अपने बहुआयामी जादुई तिलिस्मी दुनियां पर आधारित 8 खण्डों में प्रकाशनाधीन उपन्यास ‘भद्रवीर’ की परियोजना पर भी प्रकाश डाला।
‘ब्रजभाषा काव्य मंच’ के
अध्यक्ष डाॅ. रामेन्द्र शर्मा ‘रवि’ ने समारोह का सफल संचालन कर सभी उपस्थित साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया।
समारोह में इटावा से बबीता कुमारी, प्रतिभा दुबे, हाथरस से वीरेंद्र पाठक, मथुरा से आचार्य निर्मल, सादाबाद से जयप्रकाश पचौरी, साधना वैद, रमा वर्मा ‘श्याम’, मीरा परिहार, डॉ आभा चतुर्वेदी, संजय एडवोकेट, महेश शर्मा गोपाली, राज कपूर, आरती शर्मा, संजय गुप्त, राकेश निर्मल, हितेश कुमार, कामेश मिश्रा सनसनी, मोहिनी भटनागर, प्रकाश गुप्ता ‘बेवाक’, प्रभुदत्त उपाध्याय, वंदना तिवारी, चंद्रशेखर शर्मा, हरीश भदौरिया, विजय गोयल, कमलेश चंद्र जैन, राजकुमार चतुर्वेदी, विजया तिवारी आदि अनेक गणमान्य साहित्यकार मौजूद रहे।
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