भारत की पहली फीलिंग माइंड्स ई-क्यूब लैब का पोस्टर विमोचन, भावनात्मक शिक्षा की नई शुरुआत

अर्जुन रौतेला आगरा। प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल, दयालबाग में शुक्रवार को भारत की पहली फीलिंग माइंड्स ई-क्यूब लैब (अनुभवात्मक भावनात्मक शिक्षा प्रयोगशाला) के शुभारंभ के उपलक्ष्य में पोस्टर विमोचन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर शिक्षा जगत से जुड़े गणमान्य लोगों की उपस्थिति में ई-क्यूब लैब की अवधारणा, उद्देश्यों और विद्यालयी शिक्षा में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने इसे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और मानसिक स्वास्थ्य को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।


विद्यालय के निदेशक डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा कि बदलते समय में केवल शैक्षणिक उपलब्धियां ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि विद्यार्थियों का भावनात्मक रूप से मजबूत होना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने बताया कि ई-क्यूब लैब के माध्यम से विद्यार्थियों को अनुभवात्मक गतिविधियों द्वारा अपनी भावनाओं को पहचानने, समझने, सकारात्मक ढंग से व्यक्त करने तथा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संतुलित निर्णय लेने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, सहानुभूति और जीवन कौशल का विकास होगा।


फीलिंग माइंड्स की संस्थापक-निदेशक एवं ई-क्यूब लैब की संकल्पना एवं विकासकर्ता डॉ. चीनू अग्रवाल ने कहा कि यह प्रयोगशाला केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अभिभावकों, शिक्षकों, विद्यालय प्रमुखों, काउंसलरों और अन्य शिक्षार्थियों के लिए भी प्रशिक्षण एवं भावनात्मक सशक्तिकरण का केंद्र बनेगी। यहां वैज्ञानिक शोध पर आधारित सामाजिक-भावनात्मक अधिगम (SEL), मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक साक्षरता और जीवन कौशल से जुड़े विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे समाज में भावनात्मक शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।


कार्यक्रम के दौरान ई-क्यूब लैब की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि, कार्यप्रणाली और इसकी विशेषताओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) और सीबीएसई द्वारा विद्यार्थियों के समग्र विकास एवं मानसिक स्वास्थ्य को दिए जा रहे महत्व के अनुरूप है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रयोगशाला आने वाले समय में विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित करेगी और देशभर के विद्यालयों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगी। अंत में उपस्थित अतिथियों ने इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए इसे भविष्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कदम बताया।

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gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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