गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
गुजरात प्रदेश में शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाने की मांग
गुजरात में शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री और तस्करी की शिकायतें लगातार सामने आती रहती हैं। कड़े कानूनों के बावजूद बूटलेगरों द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों से अथवा अन्य गुप्त माध्यमों से शराब गुजरात में लाकर उसकी चोरी-छिपे या खुलेआम बिक्री किए जाने की घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं।
गुजरात में Bombay Prohibition Act के तहत शराब के उत्पादन, भंडारण, बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध है। शराबबंदी कानून का प्रभावी एवं कड़ाई से पालन करवाने की जिम्मेदारी पुलिस और प्रशासनिक तंत्र की है। इसके बावजूद कई स्थानों पर अवैध शराब के कारोबार को लेकर पुलिस एवं प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं।
अवैध शराब का कारोबार केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक और आर्थिक प्रभाव भी गंभीर है। विशेष रूप से युवाओं पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और कई परिवार आर्थिक एवं सामाजिक रूप से प्रभावित होते हैं। इसके साथ ही अवैध शराब के नेटवर्क से अपराध एवं कानून-व्यवस्था से जुड़ी अन्य चुनौतियां भी बढ़ सकती हैं।
शराबबंदी के कागजी प्रावधानों और जमीनी वास्तविकता के बीच दिखाई देने वाले अंतर को दूर करने के लिए सरकार एवं प्रशासन को प्रभावी रणनीति बनाकर अवैध शराब की तस्करी और बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने की आवश्यकता है।
मांग: नागरिकों, सामाजिक संगठनों एवं विपक्षी नेताओं की ओर से मांग की जाती है कि अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई की जाए, तस्करी के स्रोतों और पूरे नेटवर्क की जांच की जाए तथा यदि किसी स्तर पर पुलिस या प्रशासनिक मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही शराबबंदी कानून का प्रभावी और पारदर्शी तरीके से जमीनी स्तर पर पालन सुनिश्चित किया जाए।
टी एन न्यूज़ 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट
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