स्थायीकरण और मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर गरजीं आशा कार्यकर्ता

अर्जुन रौतेला, आगरा। संजय प्लेस स्थित यूथ हॉस्टल में हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में आशा संगिनी कर्मचारी संगठन उत्तर प्रदेश, जनपद शाखा आगरा का स्थापना दिवस समारोह उत्साहपूर्वक मनाया गया। जिला अध्यक्ष पप्पी धनगर के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में जिलेभर से पहुंचीं आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता की।


कार्यक्रम की मुख्य अतिथि खेरागढ़ विधायक भगवान सिंह कुशवाह की पत्नी अनीता कुशवाहा रहीं। उन्होंने आशा कार्यकर्ताओं के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। संगठन के पदाधिकारियों ने भी कार्यकर्ताओं की समस्याओं और अधिकारों की आवाज को मजबूती से उठाने का भरोसा दिलाया।


समारोह के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने स्थायीकरण, मानदेय बढ़ाने, कार्य के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने सहित विभिन्न मांगें प्रमुखता से उठाईं। कार्यकर्ताओं ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने, गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों की देखभाल, टीकाकरण और स्वास्थ्य जागरूकता जैसे कार्यों में वे लगातार अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें आर्थिक एवं सेवा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।


आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार से मांगों पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र समाधान की दिशा में कदम उठाने की मांग की। संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि कार्यकर्ताओं के हितों की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी और उनकी समस्याओं को संबंधित अधिकारियों एवं सरकार तक पहुंचाकर समाधान के लिए प्रयास जारी रहेंगे।


कार्यक्रम में हिंदी भाषा के महत्व और उसके प्रचार-प्रसार पर भी विचार रखे गए। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी हमारी संस्कृति और पहचान से जुड़ी भाषा है, इसलिए इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए सभी को प्रयास करना चाहिए। समारोह के अंत में संगठन की एकजुटता बनाए रखने तथा आशा एवं आशा संगिनी कार्यकर्ताओं के हितों की लड़ाई आगे भी मजबूती से जारी रखने का संकल्प लिया गया।

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gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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