29 मार्च 2025 को रामलीला मैदान जयपुर हाउस पर अपराह्न 12 बजे से मेले का आयोजन होगा

अर्जुन रौतेला संवादाता। लगभग 40 वर्षों से राष्ट्र सेविका समिति जो एक वैचारिक मंच है और विश्व भर में महिलाओं द्वारा ही संचालित किया जाता है , उसके द्वारा दिनांक 29 मार्च ‍2025 चैत्र शुक्ल प्रतिपदा और हिंदू कैलेंडर के अनुसार नव वर्ष की पूर्व संध्या पर प्रतिवर्ष भव्य मेले का आयोजन किया जाता है।

यह मेला इस वर्ष दिनांक 29 मार्च 2025 को रामलीला पार्क, जयपुर हाउस, आगरा पर लगाया जा रहा है।
राष्ट्रीय सेविका समिति द्वारा आज दिनांक 21 मार्च 2025 को विश्व संवाद केंद्र, साकेत कॉलोनी आगरा पर नव संवत्सर मेला‌ 2025 की तैयारी से संबंधित एक बैठक का आयोजन किया गयाl
मेले में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं विभिन्न प्रकार के उत्पादों की स्टाल लगाई जाएंगी। बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं जैसे चित्रकला, लेखन, मेहंदी एवं विविधि वेश प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर पुण्य श्लोका अहिल्याबाई होल्कर जी की त्रयोशताब्दी जयंती वर्ष ध्यान में रखते हुए विशेष कार्यक्रमों का भी आयोजन होगा।

कार्यक्रम के प्रारूप के अनुसार मेले का शुभारंभ अपराह्न 12 बजे हवन द्वारा किया जाएगा। उसके उपरांत अपराह्न 3 बजे से स्थलीय एवं मचीय प्रतियोगिताओं का आयोजन होगा। सायं 6:30 बजे मंचीय उद्घाटन के उपरांत सांस्कृतिक संध्या एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया जाएगा जिसमें विभिन्न क्षेत्रों से विभूतियां अपनी गरिमामयी उपस्थिति देगी। प्रतिवर्ष समिति द्वारा भव्य रूप में इस मेले का सफल आयोजन किया जाता है एव बड़ी संख्या में शहरवासी नव वर्ष मेले में आते हैं। स्टॉल बुकिंग के लिए समिति के नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है।

राष्ट्र सेविका समिति

सूचना –
राष्ट्र सेविका समिति द्वारा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की पूर्व संध्या पर नव वर्ष मेले का आयोजन रामलीला पार्क जयपुर हाउस, आगरा पर दिनांक 29 मार्च 2025 को दोपहर 12:00 बजे से किया जाएगा। मेले में स्टॉल की जानकारी लेने के लिए 8077551327 , 9410006276 नंबरो पर संपर्क कर सकते हैं।

अन्य खबरों हेतु संपर्क करें संवादाता अर्जुन रौतेला 8868868461

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gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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