12/09/2025 गुजरात सूरत
हाल ही में सूरत सिंचाई परिपत्र के अधीक्षण अभियंता द्वारा काकरापार दाहिने किनारे विभाग की नहरों में 1 दिसंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 (90 दिन तक) सिंचाई का पानी बंद करने का तुगलकी निर्णय एवं सूरत जिले से होकर विद्युत लाइन ले जाने के मुद्दे पर किसान समाज गुजरात द्वारा किसानों, पशुपालकों और सहकारी नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक ओलपाड-हाथीसा रोड स्थित खुंटाई माता मंदिर प्रांगण में रखी गई थी।
बैठक में किसान समाज गुजरात के अध्यक्ष जयेशभाई पटेल, सहकारी व किसान नेता दर्शनभाई नायक, भरूच के सहकारी व किसान नेता संदीपभाई मांगरोला, दक्षिण गुजरात किसान समाज के अध्यक्ष रमेशभाई पटेल, सूरत जिला किसान समाज के अध्यक्ष परिमलभाई पटेल, गुजरात किसान समाज के महामंत्री महेन्द्रसिंह करमणिया, हांસोट तालुका के सामाजिक, कामरेज तालुका किसान समाज के अध्यक्ष बलवंतभाई पटेल, किसान नेता वल्लभभाई पटेल, मांगरोल तालुका किसान समाज के अध्यक्ष दिनेशसिंह, चोरiyasi तालुका किसान समाज के अध्यक्ष कल्पेशभाई पटेल, ओलपाड तालुका किसान समाज के अध्यक्ष केतनभाई देसाई, एडवोकेट राजुभाई परमार तथा ओलपाड, कामरेज, मांगरोल, चोरiyasi, महुवा, हांસोट आदि तालुकों के बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।
बैठक के बाद किसानों द्वारा रैली निकालकर ओलपाड प्रांत कार्यालय व नायब कलेक्टर साहब को दो अलग-अलग आवेदन पत्र दिए गए।
किसानों ने कहा कि अधीक्षण अभियंता द्वारा उद्योगपतियों व फैक्टरियों के साथ बैठकों के बाद बिना किसी पूर्व अध्ययन या अग्रिम सूचना के नहरों को 90 दिन के लिए बंद करने का निर्णय लिया गया है। वर्ष 2013-14 में भी इन नहरों की मरम्मत पर 250 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किया गया था, फिर भी अब दुबारा मरम्मत का बहाना बनाकर किसानों की खरीफ, रबी व गर्मी की फसलों को नुकसान पहुँचाने की योजना बनाई जा रही है।
इसके अलावा, विद्युत टॉवर लाइन से जुड़े मामलों पर भी किसानों ने गंभीर आपत्ति जताई और निम्नलिखित माँगें रखीं:
1885 का टेलीग्राफिक एक्ट रद्द कर किसानों को लाभदायक नया कानून बनाया जाए।
2003 का इलेक्ट्रिसिटी एक्ट किसानों के हक में संशोधित किया जाए तथा इसका गलत अर्थ निकालकर कंपनियों द्वारा बिना नोटिस और मुआवजे के किसानों की जमीन में प्रवेश कर टॉवर खड़ा करने की घटनाओं की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो।
भूमि अधिग्रहण कानून 2013 की धारा 105 और अनुसूची-4 के प्रावधानों का पालन अनिवार्य किया जाए।
टेलीग्राफ एक्ट 1885 व इलेक्ट्रिसिटी एक्ट 2003 अप्रासंगिक हो चुके हैं, इनमे संशोधन कर नए कानून बनाए जाएँ।
गुजरात के 14 जिलों के प्रभावित किसानों के असंतोष को ध्यान में रखते हुए नई नीति बनाई जाए।
टॉवर लाइन हेतु भूमि अधिग्रहण कानून 2013 के तहत 4 गुना बाजार मूल्य का मुआवजा दिया जाए।
टॉवर स्थायी रूप से खड़े रहते हैं, इसलिए प्रभावित क्षेत्र के किसानों को मासिक किराया देने का प्रावधान हो।
जब तक नया कानून न बने, प्रत्येक टॉवर के लिए किसान को 2 करोड़ रुपये का मुआवजा तत्काल घोषित किया जाए।
किसानों ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर 90 दिनों के लिए नहर बंद करने का निर्णय रद्द नहीं किया गया, तो 10,000 किसान विशाल रैली निकालकर सिंचाई विभाग का घेराव करेंगे और सड़कें जाम करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी
टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्मके खिलाफ सूरत से संवाददाता राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419
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