भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में (नवम्बर 2025 )में की नई व्याख्या 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले पहाड़ों और टीलों को ही अरावली हिल्स माना जाए गा

१७/१२/२०२५ टी यन न्यूज़ 24 गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट

*सुप्रीम कोर्ट की नई व्याख्या” (Supreme Court’s New Interpretation):

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में (नवंबर 2025 में) अरावली पर्वतमाला की एक नई “समान परिभाषा” (Uniform Definition) को स्वीकार किया है। इस नई परिभाषा के अनुसार, केवल 100 मीटर से अधिक ऊँचाई वाले पहाड़/टीलों को ही “अरावली हिल्स” माना जाएगा।

93% पहाड़ खनन के लिए खुले?” (93% Mountains Open for Mining?): चिंताजनक सच्चाई**

पर्यावरणविदों और विशेषज्ञों के अनुसार, इस “100 मीटर” वाली शर्त के कारण अरावली रेंज का बड़ा हिस्सा (अनुमानतः 90% से 99% तक, विशेष रूप से राजस्थान और हरियाणा में) कानूनी संरक्षण खो सकता है।

*फोटो में जो 93% का आँकड़ा दिया गया है, वह इसी संदर्भ में है। यदि यह क्षेत्र “अरावली” की परिभाषा से बाहर हो जाता है, तो वहाँ खनन (माइनिंग) पर लगा प्रतिबंध हट सकता है और वह क्षेत्र खनन के लिए खुल सकता है।*

*भारत की सबसे पुरानी पर्वतमाला पर बड़ा संकट!” (Crisis on Oldest Mountain Range): सही**

अरावली भारत की सबसे पुरानी पर्वतमाला है। यदि इसके बड़े हिस्से से संरक्षण हटता है, तो पर्यावरण को भारी नुकसान हो सकता है (जैसे रेगिस्तान का विस्तार, भूजल स्तर में गिरावट आदि)। इसलिए इसे “बड़ा संकट” कहना गलत नहीं है।

महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण

हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल नई खनन लीज़ देने पर अस्थायी रोक लगा रखी है, जब तक सरकार “सस्टेनेबल माइनिंग प्लान” तैयार नहीं कर लेती। यानी ऐसा नहीं है कि कल से ही सब कुछ खुल जाएगा, लेकिन भविष्य में इन क्षेत्रों में खनन का रास्ता साफ हो गया है, जो एक गंभीर विषय है।

वास्तव में यह फोटो जो दावा कर रही है, वह एक वास्तविक और गंभीर पर्यावरणीय मुद्दे की ओर इशारा करती है। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से अरावली के अस्तित्व पर वास्तव में खतरा पैदा हो गया है।

टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्मके खिलाफ सूरत से संवाददाता राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419

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