संवाददाता अर्जुन रौतेला। नमस्कार दोस्तों आजका हमारा लेख है आगरा की मालती कुशवाह के ऊपर जिन्होंने महिला सशक्तिकरण को जाना और काम किया।
सारी कहानी मालती कुशवाह की जुबानी – आगरा के एक गांव से निकलकर मुझे एक्सेज डेवेलपमेंट सर्विसेज के महिला सशक्तिकरण प्रोजेक्ट ताज सिटी रिक्सा के बारे में जानकारी हुई। मेरा सौभाग्य रहा कि मैं इस प्रोजेक्ट में बतौर मोब्लाइजर जुड़ पाई। विगत तीन माह से इस प्रोजेक्ट में हर दिन कुछ नया सीख रही हूं। खुद को बेहतर करने की शुरुआत मेरी महिला चालकों की टीम गठन से हुई। तमाम बस्तियों में जाकर इस प्रोजेक्ट के उद्देश्य तथा महिलाओं के लिए सकारात्मक वातावरण संबंधी बातचीत कर के मेरी खुद की भी समझ बेहतर हुई। महीने भर ड्राइविंग की ट्रेनिंग के दौरान सड़कों पर सरपट दौड़ते रिक्शे ने मुझ में खूब आत्म विश्वास भर दिया।
गत सप्ताह 16, 17 व 18 जनवरी 2026 को मुझे 8 साल से चल रहे सफलतम व मशहूर प्रोजेक्ट पिंक सिटी रिक्सा कंपनी जयपुर देखने और समझने का मौका मिला। दूसरे किसी शहर में अकेले जाना, रुकना व मुसाफिरों को राइड कराना मेरे लिए बहुत अनोखा और ज्ञानवर्धक रहा। जयपुर जाते समय रास्ते में बस के सफर के दौरान मैं पूरे समय यहीं सोचती रही कि वहाँ न जाने कैसे लोग मिलेंगे? एक अजीब सी बेचैनी, घबराहट तथा अनजाना डर मन में बैठा हुआ था। जयपुर के सिन्धी कैम्प बस अड्डे पर उतरकर मैने पिंक सिटी रिक्सा कंपनी मोब्लाइजर रेनू शर्मा से कॉल किया।

रेनू जी से रुकने ठहरने व कंपनी का पता पूंछने संबंधी संछिप्त बातचीत ने मेरी रास्ते की थकान दूर कर दी। उनकी बातचीत की शैली सरल व सहयोगात्मक थी।
हमारी ताज सिटी रिक्सा कंपनी के मैनेजर दिनेश सुथार जी ने अशोक मार्ग जयपुर स्थित होटल सिल्वर स्टे में पहले से ही मेरे लिए एक रूम बुक कर रखा था जहां मैं रेनू जी के सहयोग से आसानी से पहुंच दोपहर 12 बजे पहुंच गई। होटल में अकेले ठहरना भी मेरे लिए नया अनुभव था। वहाँ से बैग्स रख कर फ्रेश होकर एक बजे मै पिंक सिटी रिक्सा कंपनी की महिला चालकों से मिलने के लिए रेनू जी द्वारा बताए गए जनाना हॉस्पिटल चांद पोल गई। वहाँ मै पिंक सिटी रिक्सा में पहली बार महिला चालक मोनिका और लता जी के साथ बैठी। पिंक सिटी रिक्सा बहुत साफ सुथरा व आराम दायक था।

राइड करते हुए हम शाम 4 बजे आगरा के ताज सिटी रिक्सा के निर्माण करने वाली फैक्ट्री पहुंचे। आगरा के सभी रिक्सा कंप्लीट होने के अंतिम चरण में थे। उनमें सीट फिटिंग और कलर करने का काम शेष था। निर्माता कंपनी एस एस डी के संचालक से बात करने से ज्ञात हुआ कि ये रिक्से कंप्लीट होकर 26 जनवरी को आगरा के लिए लोड कर दिए जाएंगे। तत्पश्चात मैं नाहरगढ़ का किला देखने अपनी पिंक सहेलियों के साथ चली गई। नाहरगढ़ का किला जयपुर अरावली का सबसे ऊंचा किला है जो 1734 में सवाई जयसिंह द्वितीय ने बनवाया। इसकी चोटी से जयपुर शहर का बेहद खूबसूरत नजारा देखने को मिलती है। रात आठ बजे मैं अपने होटल कक्ष में विश्राम के लिए पहुंच गई।

दूसरे दिन सुबह 8 बजे मैं पिंक सिटी रिक्सा कंपनी के पार्किंग स्थल पर उपस्थित हुई। रेनू जी पर राइड के लिए कई मुसाफिरों व गाइडों के कॉल आ रहे थे। रिक्सा उपलब्ध थे चालक कम थी लिहाजा एक रिक्सा की स्टेयरिंग मैंने संभाली। नए, विराट व अनजाने शहर की सड़कों पर विदेशी मेहमानों को बिठाकर छः रिक्सों के मध्य मैं भी अपने रिक्से को फर्राटे से चलाती रही। इस राइड में हमने मसाले मार्केट, चांद पोल बाजार,जल महल व हवा महल की विजिट कराई। विजिट के बाद मुसाफिर मुझे खुशी से टिप देकर भी गए। रिक्से को पार्किंग स्थल पर खड़ी करके शाम को मैं जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल तथा वर्ल्ड ट्रेड पार्क मॉल में भी घूमने चली गई।
तीसरे दिन 11 बजे होटल से चेक आउट करके पार्किंग स्थल पर पिंक महिला चालकों से उनकी पृष्ठभूमि, कार्यशैली व चुनौतियों के बारे में चर्चा करके मैं सिंधी कैंम्प बस स्टैंड पहुंची। वहीं एक पवित्र भोजनालय में राजस्थानी थाली का भोजन करके आगरा के लिए रवाना हुई। इस तरह इस विजिट ने मुझे अपने काम की समझ व तौर तरीकों को बेहतर करने का मौका दिया। एक्सेज डेवलपमेंट सर्विसेज के पदाधिकारियों व पिंक सिटी रिक्सा कंपनी की सहेलियों का बहुत आभार व धन्यवाद।
अन्य खबरों हेतु संपर्क करें संवाददाता अर्जुन रौतेला 8868868461
Updated Video




Subscribe to my channel





