देश में आज 77वां गणतंत्र दिवस पूरे हर्षोल्लास और गर्व के साथ मनाया गया। राजधानी दिल्ली से लेकर छोटे शहरों और गांवों तक तिरंगा शान से लहराया। इसी क्रम में फतेहपुर सीकरी के विभिन्न स्कूलों में भी गणतंत्र दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।

बच्चों ने देशभक्ति गीत, नृत्य, नाटक और भाषणों के माध्यम से संविधान, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। विद्यालय परिसरों में उत्सव का माहौल रहा। फतेहपुर सीकरी शाही स्मारक के दीवान ए आम में भी एस आई एस जवानो ने भी परेड कार्यक्रम आयोजित किए। ए एस आई सहायक संरक्षण दिलीप सिंह व कमांडर मुकेश यादव द्वारा गाइड साथियों के साथ मिलकर ध्वजारोहण किया।

भारत में कब उठी संविधान सभा की मांग, 26 जनवरी को ही गणतंत्र दिवस क्यों? जानिए बड़ी बातें
Republic Day 2026 : भारत इस वर्ष अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। यह दिवस भारत का राष्ट्रीय पर्व है। इसी दिन से भारत एक पूर्ण गणंत्रत राज्य बना था। भारत को संविधान का निर्माण करने में लंबा वक्त लगा, हालांकि भारत के लिए संविधान का निर्माण करने की मांग 1947 से पहले ही पिछले कई वर्षों से हो रही थी। वो पहला मौका था, जब संविधान सभा की मांग पहली बार साल 1895 में बाल गंगाधर तिलक ने उठाई थी।
भारत इस साल 26 जनवरी को अपना 77वां गणतंत्र दिवस मनाने के लिए तैयार है। राष्ट्रीय गौरव का दिन, गणतंत्र दिवस देश की स्वतंत्रता, एकता और गरिमा का प्रतीक है। इस दिन, राष्ट्रपति राजपथ पर झंडा फहराते हैं, उसके बाद सैनिकों और अर्धसैनिक बलों की एक भव्य परेड होती है।

भारत के लिए संविधान की आवश्यकता इतिहास में बहुत पहले ही स्पष्ट हो गई थी। संविधान सभा की मांग सबसे पहले 1895 में बाल गंगाधर तिलक ने उठाई थी। 1928 की नेहरू रिपोर्ट और 1935 के भारत सरकार अधिनियम जैसे दस्तावेजों ने इस आवश्यकता पर और ज़ोर दिया। 1925 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में कॉमनवेल्थ ऑफ इंडिया बिल पेश किया गया, जो भारत के लिए संवैधानिक व्यवस्था की रूपरेखा तैयार करने का पहला प्रयास था।

6 दिसंबर 1946 को देश के कानून और नियम बनाने के लिए संविधान सभा की स्थापना की गई थी। भारतीय संविधान का मसौदा तैयार करने में सभा को दो साल, ग्यारह महीने और अठारह दिन लगे। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने भारतीय संविधान को अपनाया, जिसके कुछ प्रावधान तुरंत प्रभाव से लागू हो गए। हालाँकि संविधान 26 नवंबर 1949 तक तैयार हो गया था, लेकिन इसके महत्व के कारण 26 जनवरी को चुना गया, जिसके कारण 26 जनवरी 1950 को संविधान का पूर्ण कार्यान्वयन हुआ।
26 जनवरी का महत्व 26 जनवरी 1930 से शुरू होता है, जब पूर्ण स्वराज (पूर्ण स्वतंत्रता) के लिए आधिकारिक रूप से संकल्प की घोषणा की गई थी। इस ऐतिहासिक महत्व के कारण 26 जनवरी को संविधान लागू करने के दिन के रूप में चुना गया, जिससे यह 1950 में पूरी तरह से प्रभावी हो गया। इसलिए, हर साल 26 जनवरी को भारत इस महत्वपूर्ण अवसर को मनाने के लिए गणतंत्र दिवस मनाता है।

1985 में पहली बार संविधान सभा की मांग
संविधान सभा की मांग पहली बार साल 1895 में बाल गंगाधरतिलक ने उठाई थी। 1928 की नेहरू रिपोर्ट, 1935 का भारत शासन अधिनियम और कई अन्य दस्तावेजों ने भी संविधान की आवश्यकता को रेखांकित किया था। फिर 1925 में महात्मा गांधी की अध्यक्षता में कामनवेल्थ ऑफ इण्डिया बिल प्रस्तुत किया गया। यह भारत के लिए संवैधानिक प्रणाली की रूपरेखा प्रस्तुत करने का पहला प्रयास था।
1946 में हुई संविधान सभा की स्थापना
देश के नियमों और कानूनों को बनाने के लिए 6 दिसंबर 1946 को संविधान सभा की स्थापना हुई। इस सभा ने दो साल ग्यारह महीने और 18 दिन में देश का संविधान बनाकर तैयार कर दिया। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा ने भारतीय संविधान को स्वीकार किया और उसके कुछ धाराओं को लागू भी किया गया। भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हो चुका था, लेकिन इसे 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था।
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