गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि कलम से
सनातनियों से खास अपील देश में हिंदू धर्म को बर्बाद करने की साज़िश? पढ़िए और समझिए क्या हो रहा है
पहले घटना को समझते हैं। फिर कानून के अनुसार आगे क्या कार्रवाई होगी, यह देखते हैं। उसके बाद यह क्यों हुआ—और अंत में इस पूरे खेल के पीछे की वास्तविकता पर बात करते हैं।
इसलिए ध्यान से समय निकालकर पढ़िए, क्योंकि यह विषय हर व्यक्ति के जीवन को छूता है—कि कैसे कानून को चालाक नेताओं ने विरोधियों को निपटाने का औज़ार बना लिया है।
प्रयागराज में POCSO कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य स्वामी मुक्तानंद गिरि के खिलाफ नाबालिग लड़कों के यौन शोषण के आरोप में FIR दर्ज करने का आदेश दिया है।
यह आदेश शंकुरी पीठाधीश्वर आशुतोष महाराज की अर्जी पर दिया गया, जिन्होंने पुलिस की निष्क्रियता के बाद कोर्ट का रुख किया था।
आरोप है कि हाल ही में संपन्न हुए माघ मेले के दौरान स्वामी के कैंप में दो नाबालिग लड़कों का यौन शोषण किया गया।
कोर्ट ने 14 फरवरी को आदेश सुरक्षित रखा और 21 फरवरी को जारी किया, जिसमें जूंसी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया।
जज विनोद कुमार चौरसिया ने कहा कि आरोप POCSO अधिनियम, 2012 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत संज्ञेय अपराध हैं, और पुलिस की जांच करना कानूनी जिम्मेदारी है।
ताज़ा अपडेट के अनुसार, 22 फरवरी 2026 को FIR दर्ज हो चुकी है। कानून के मुताबिक, POCSO अधिनियम के तहत मामले संज्ञेय और गैर-जमानती होते हैं—अर्थात पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार होता है, लेकिन यह जांच पर निर्भर करता है।
यदि पुलिस को प्राथमिक साक्ष्य मिलते हैं कि आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है या फरार हो सकता है, तो गिरफ्तारी हो सकती है। हालांकि तुरंत गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं; यह जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार गिरफ्तारी की कोई खबर नहीं है।
(आगे की प्रक्रिया इस प्रकार होगी )
पुलिस शिकायतकर्ताओं के बयान लेगी, सबूत जुटाएगी, गवाहों से पूछताछ करेगी और पीड़ितों की मेडिकल जांच कराएगी। POCSO के तहत जांच दो महीने में पूरी करनी होती है।
आवश्यकता होने पर गिरफ्तारी हो सकती है, लेकिन आरोपी कोर्ट में जमानत के लिए आवेदन कर सकता है। POCSO मामलों में जमानत मिलना कठिन होता है।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस चार्जशीट दाखिल करेगी, जिसमें आरोप और सबूत होंगे।
मामला POCSO कोर्ट में चलेगा, जहां पीड़ितों और आरोपी की सुनवाई होगी। ट्रायल शीघ्र पूरा करने का प्रावधान है और पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखी जाती है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को झूठा बताया है और कहा है कि जांच से सच्चाई सामने आएगी। उनका कहना है कि आरोप लगाने वाले आशुतोष महाराज स्वयं हिस्ट्रीशीटर हैं और लोगों को ब्लैकमेल कर पैसे वसूलते हैं।
( कुछ संदिग्ध सवाल )
क्या यह शिकायत शंकराचार्य को निपटाने के लिए की गई है?
इतने वर्षों में पहले कभी ऐसी बात क्यों नहीं आई?
फॉरेंसिक मनोविज्ञान के अनुसार आरोपी से अधिक मजबूत मोटिव और लाभ शिकायतकर्ता के पास दिखाई देता है।
(घटना के समय क्या शोषण संभव होने जैसी परिस्थितियाँ थीं )
बाल यौन शोषण की शिकायत उस समय दी गई जब माघ मेले के स्नान के दौरान शंकराचार्य और प्रयाग राज प्रशासन के बीच टकराव हुआ था। इस मुद्दे पर देशभर के सच्चे और निष्ठावान सनातनियों में आक्रोश फैला था, जो कथित रूप से योगी आदित्यनाथ की छवि को नुकशान पहुँचा रहा था।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद हमेशा सनातन धर्म के पक्ष में बोलते आए हैं और नेताओं द्वारा धर्म के उपयोग की आलोचना करते रहे हैं।हाल में हिंदू, माघ मेले में शंकराचार्य के साथ हुए अन्याय और व्यवहार को लेकर नरेंद्र मोदी और योगी सरकार से नाराज़ थे। साथ ही UGC का मुद्दा भी हिंदुओं को सरकार के खिलाफ कर रहा था।
ऐसा प्रतीत होता है कि अंदर खाने अविमुक्तेश्वरानंद और UGC मुद्दे का कांग्रेस द्वारा उपयोग कर सरकार को अस्थिर करने की आशंका मोदी और योगी को हुई हो—या वे इस प्रबल संभावना को पहले ही टालना चाहते हों—इसी कारण यह मामला खड़ा किया गया हो!
माघ मेले के दौरान जिस समय घटना होने का आरोप लगाया गया, तब प्रशासन और शंकराचार्य के बीच लगातार तनाव था और शंकराचार्य धरने पर बैठे थे। सैकड़ों भक्तों और पुलिस से घिरे शंकराचार्य ऐसा कृत्य कैसे कर सकते थे?
संक्षेप में, यदि शंकराचार्य योगी और मोदी—दोनों के एजेंडे को नुकशान पहुँचा रहे थे, तो क्या उस नुकशान को टालना ही इस शिकायत का मोटिव हो सकता है?
भारत की राजनीति में अतीत में भी ऐसी “कारीगरी” देखी गई है—जिसके बाद पुलिस, प्रशासन और सत्ता का दुरुपयोग विरोधियों के खिलाफ करने की परंपरा शुरू हुई, जिसने राजनीति को उकाड़-पछाड़ बना दिया।
(सोचिए )
राहुल गांधी या विपक्षी नेताओं पर अक्सर भ्रष्टाचार के आरोप क्यों लगते हैं? क्योंकि उनकी छवि को भ्रष्टाचार से ही नुकसान पहुँचाया जा सकता है।इसी तरह, किसी साधु-संत की छवि बिगाड़नी हो तो यौन शोषण का आरोप सबसे प्रभावी माना जाता है; साधु पर भ्रष्टाचार का आरोप उतना असर नहीं करता।
(जैसा शिकार, वैसा जाल )
आज के सत्ताधीश समझ चुके हैं कि यदि भारत के बहुसंख्यक हिंदुओं को कमजोर करना हो, तो पहले उनके धर्म को निशाना बनाओ—उनकी आत्मगौरव, नैतिकता, सिद्धांत और संस्कारों को खत्म करो। इसका सबसे आसान तरीका धर्म में पाखंडी और लोलुप साधुओं को घुसाना और उन्हें बढ़ावा देना है।
एक बात की सौ बात—नीचता और हलकापन के मामले में आज के सत्ताधीशों के सामने अंग्रेज़ों की भी कोई हैसियत नहीं थी—यह मानना पड़ेगा।
टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419
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