गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि कलम से
गुजरात प्रदेश सुरत शहर की उसी पुरानी नाकेदार, यानी छोटी सी चाह किटली पर आज भी दो कप चाय का ऑर्डर दिया जाता है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब एक कप चाय ऐसे ही बिना पिए ठंडी हो जाती है।
सालों पहले इसी किटली पर दो दोस्त जेब में मुश्किल से पाँच रुपये लेकर आया करते थे। अगर किसी की जेब में पैसे न होते तो दूसरा दोस्त हँसते हुए कंधे पर हाथ रखकर कहता, “अरे भाई इसमें परेशान होने की क्या बात है? तेरा भाई अभी जिंदा बैठा है न!”
उस समय जेब भले ही खाली होती थी, लेकिन रिश्तों में रुपये से भी ज्यादा गर्माहट दोस्ती में होती थी। एक प्लेट नाश्ता साथ में खाना, एक ही बाइक पर पूरे शहर में घूमना और रात के अँधेरे में भविष्य के बड़े-बड़े सपने देखना… उस भाईचारे में कोई स्वार्थ नहीं था, बस एक-दूसरे के लिए मर मिटने का जज़्बा था।
लेकिन समय के साथ सपने पूरे होने लगे और रास्ते भी बदल गए। वह दोस्त जो हमेशा कहा करता था, “हम कभी अलग नहीं होंगे”, आज शहर का बहुत बड़ा आदमी बन गया है। अब उसके पास बड़ी गाड़ी है, एयर-कंडीशंड ऑफिस है और उसके आसपास मतलबी लोगों की बड़ी भीड़ बनी रहती है।
लेकिन उसी भीड़ में वह पुराना दोस्त, वह भाईचारा कहीं हमेशा के लिए खो गया है। कुछ समय पहले जब इस साधारण दोस्त के पिता का अचानक निधन हो गया था और उसे दुनिया में किसी अपने की जरूरत थी, तब उसने रोते-रोते उसी पुराने सच्चे दोस्त को फोन किया…। गजब है यह दस्ता
प्रस्तुत करता टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास कलम से स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419
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