अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस पर बालिकाओं ने बिखेरी संस्कृति की छटा

संवादाता अर्जुन रौतेला आगरा। गणेश रामनागर सरस्वती बालिका विद्या मंदिर, बलकेश्वर में बुधवार को ‘अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस’ के अवसर पर भव्य नृत्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में छात्राओं ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करते हुए विभिन्न शास्त्रीय एवं लोक नृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियाँ दीं।


छात्राओं ने ओडिसी, कथक, कुचिपुड़ी एवं कथकली जैसे शास्त्रीय नृत्यों के साथ-साथ बिहू, लावणी और पंजाबी जैसे लोक नृत्यों को पारंपरिक वेशभूषा में प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी भाव-भंगिमाओं, लय और ताल के समन्वय ने उपस्थित बच्चों को भारतीय संस्कृति की विविधता से रूबरू कराया।
विद्यालय में विगत तीन वर्षों से यह दिवस उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा है। पिछले वर्ष 1184 छात्राओं द्वारा कथक और भरतनाट्यम की सामूहिक प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही थी। इस वर्ष भी विभिन्न कक्षाओं की छात्राओं ने रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।


कक्षा 6 की छात्राओं ने नृत्य मुद्राओं को रंगों के माध्यम से उकेरा, वहीं कक्षा 7 की छात्राओं ने नृत्य में प्रयुक्त आभूषणों का सृजन किया। कक्षा 8 की छात्राओं ने नृत्यांगनाओं के आकर्षक कोलाज बनाए। कक्षा 9 की छात्राओं ने ‘मेरा डांस मेरी पहचान’ विषय पर प्रभावशाली लेखन प्रस्तुत किया। कक्षा 11 की छात्राओं ने शास्त्रीय एवं लोक संगीत पर आधारित नृत्य मुद्राओं का कलात्मक चित्रण कर भावों की सुंदर अभिव्यक्ति की।


इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या ने कहा कि नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि आत्म-अभिव्यक्ति, अनुशासन और सांस्कृतिक जुड़ाव का सशक्त साधन है। यह कला जीवन में लय, संतुलन और सौंदर्य का समावेश करती है।
कार्यक्रम का संचालन संगीताचार्य पूनम शर्मा एवं श्वेता गुप्ता ने किया।
कार्यक्रम के अंत में पूरे परिसर में उत्साह और उल्लास का वातावरण देखने को मिला। इस प्रकार अंतर्राष्ट्रीय नृत्य दिवस विद्यालय में एक प्रेरणादायक एवं अविस्मरणीय आयोजन के रूप में संपन्न हुआ।

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  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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