गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी कि खास रिपोर्ट
गुजरात प्रदेश में गौचर भूमि पर भूमाफियाओं का कब्जा, सरकार आखिर मौन क्यूं
पशुओं को चराएं कहा पर गुजरात में अब मात्र 8.5 लाख हेक्टेयर गौचर भूमि शेष
गुजरात में जहां विकास की बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं, वहीं गौचर भूमि (चरागाह) पर भूमाफियाओं के कब्जे के कारण स्थिति गंभीर होती जा रही है। राज्य में अब केवल 8.5 लाख हेक्टेयर गौचर भूमि ही बची है, जिससे पशुओं के चरने की समस्या विकराल बन गई है।
मालधारी एवं पशुपालकों के सामने आज जीविका का संकट खड़ा हो गया है। जानकारी के अनुसार, पहले प्रत्येक 100 पशुओं के लिए 16 हेक्टेयर गौचर भूमि निर्धारित थी, लेकिन नीतिगत विफलताओं और अवैध कब्जों के चलते यह व्यवस्था खत्म होती जा रही है।
राज्य में लगभग 20 प्रतिशत गौचर भूमि पर भूमाफियाओं का कब्जा बताया जा रहा है। पहले गांवों में पर्याप्त गौचर भूमि उपलब्ध थी, लेकिन अब दो हजार से अधिक गांवों में गौचर समाप्त हो चुकी है। कई स्थानों पर गौचर भूमि पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण होने से पशुपालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि आज कई गांवों में पशुओं को चराने के लिए जगह ही नहीं बची है। मजबूरी में पशुपालक अपने पशुओं को तबेलों में बांधकर रखने को विवश हैं।
इस पूरे मामले में सरकार की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं और पशुपालकों में भारी रोष देखा जा रहा है। मांग की जा रही है कि गौचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराकर पशुपालकों को राहत दी जाए।
टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419
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