भारतीय चीनी उद्योग संकट में पिछले तीन वर्षों से चीनी उत्पादन में लगातार और भारी गिरावट दर्ज की गई उसको लेकर गुजरात प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री श्री दर्शन भाई ए नायक ने सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की

गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महा मंत्री श्री दर्शन कुमार ए नायक ने कहा कि भारतीय चीनी उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है

भारतीय चीनी उद्योग इस समय गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। पिछले तीन वर्षों में चीनी उत्पादन में लगातार और भारी गिरावट दर्ज की गई है। वर्तमान में सरकार द्वारा सितंबर 2026 तक चीनी निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, ताकि घरेलू बाजार में कीमतें नियंत्रित रखी जा सकें।

चीनी बैलेंस शीट (अक्टूबर-सितंबर सीजन) – MMT में:

• 2022-23: उत्पादन 33.0, निर्यात अनुमति 6.2

• 2023-24: उत्पादन 32.0, निर्यात अनुमति 0.2

• 2024-25: उत्पादन 27.4, निर्यात अनुमति 1.2

इस गिरावट के प्रमुख कारणों में सरकार द्वारा चीनी के MSP (Minimum Selling Price) में कोई वृद्धि न करना शामिल है। पिछले कई वर्षों से MSP ₹31 प्रति किलो पर ही स्थिर है, जबकि उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है।

गन्ना किसानों को लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है। FRP बढ़ाई जाती है, लेकिन मिलों को चीनी बेचने से होने वाली आय उसी अनुपात में नहीं बढ़ती। इसके अलावा खाद, डीजल, पेट्रोल, बीज और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो रही है।

अनियमित वर्षा, उत्पादन में कमी और एथेनॉल उत्पादन की ओर अधिक डायवर्जन भी चीनी उत्पादन में गिरावट के महत्वपूर्ण कारण हैं।

गन्ना किसानों को उचित मूल्य न मिलने से उनकी आय घट रही है और कई क्षेत्रों में किसान गन्ने की खेती छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी ओर, चीनी मिलों पर कम कीमतों और निर्यात प्रतिबंध के कारण आर्थिक दबाव बढ़ गया है, जिससे उनकी उत्पादन क्षमता और निवेश प्रभावित हो रहा है।

यदि यही स्थिति जारी रही, तो लंबे समय में देश की चीनी उत्पादन क्षमता कमजोर हो जाएगी, जिसका नुकसान किसानों, चीनी मिलों और उपभोक्ताओं — तीनों को भुगतना पड़ेगा।

भारतीय जनता पार्टी के समर्थन से सहकारी चीनी मिलों में अध्यक्ष और निदेशक पदों पर बैठे सहकारी नेता इस गंभीर मुद्दे पर मौन क्यों हैं?

क्या गन्ना किसानों के प्रति उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है?

मेरा स्पष्ट मत और मांग है कि सरकार को तत्काल चीनी के MSP में वृद्धि करनी चाहिए, ताकि चीनी मिलों को उचित आय प्राप्त हो सके और किसानों के बकाया भुगतान का समाधान हो सके। साथ ही, गन्ने के FRP और चीनी के MSP के बीच संतुलन स्थापित किया जाना चाहिए।

सरकार को चीनी निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध की पुनः समीक्षा कर, उपलब्ध स्टॉक की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सीमित मात्रा में निर्यात की अनुमति देनी चाहिए।

किसानों को राहत देने के लिए खाद और डीजल पर सब्सिडी बढ़ाई जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम और चीनी उत्पादन के बीच संतुलित नीति लागू की जानी चाहिए।

दीर्घकालिक नीति बनाकर गन्ने के क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने तथा लागत कम करने हेतु किसानों को सहायता और सब्सिडी प्रदान की जानी चाहिए।

माननीय सरकार यदि इस संकट में शीघ्र हस्तक्षेप करती है, तो किसानों और उद्योग दोनों को मजबूती मिलेगी तथा देश की चीनी सुरक्षा भी सुदृढ़ होगी। हमें सरकार से त्वरित और सकारात्मक कदमों की आशा है।

टी यन न्यूज 24 आवाज जुर्म के खिलाफ गुजरात हेड राजेंद्र तिवारी के साथ राजेश देसाई कि खास रिपोर्ट स्थानीय प्रेस नोट और विज्ञापन के लिए संपर्क करें 9879855419

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