थाने में छोड़ दिया दो मासूम, वायरल मामले में पुलिस का पक्ष आया सामने, बच्चों को सुरक्षित परिजनों तक पहुंचाने का दावा

वायरल मामले में पुलिस का पक्ष आया सामने, बच्चों को सुरक्षित परिजनों तक पहुंचाने का दावा

 

आगरा। थाना किरावली में दो नाबालिग बच्चों को थाने में बैठाकर पूछताछ किए जाने और किशोर न्याय अधिनियम के उल्लंघन से जुड़े वायरल मामले में अब पुलिस प्रशासन का पक्ष सामने आया है। पुलिस अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर प्रसारित खबरों को भ्रामक बताते हुए पूरे घटनाक्रम की अलग तस्वीर पेश की है।

 

पुलिस के अनुसार कस्बा किरावली की एक मोबाइल दुकान पर दो नाबालिग बच्चे मोबाइल बेचते हुए दिखाई दिए थे। मोबाइल संदिग्ध लगने पर एक पत्रकार ने थाना प्रभारी किरावली को फोन कर सूचना दी और बताया कि वह दोनों बच्चों को थाने लेकर आ रहा है। पुलिस का कहना है कि थाना प्रभारी ने फोन पर ही बच्चों को थाने में छोड़ना उचित नहीं होने की बात कही थी, लेकिन इसके बावजूद पत्रकार बच्चों को थाना परिसर में छोड़कर चला गया।

 

बताया गया कि इस दौरान बच्चों के फोटो भी खींचे गए, जिन्हें बाद में सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। पुलिस प्रशासन का दावा है कि बच्चों को किसी प्रकार की पूछताछ के लिए थाने में नहीं बैठाया गया और न ही उनके साथ कोई अनुचित व्यवहार किया गया।

 

पुलिस के मुताबिक मामले को संवेदनशीलता से लेते हुए बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। थाना पुलिस ने दोनों बच्चों को सुरक्षित उनके घर अछनेरा पहुंचाकर परिजनों के सुपुर्द कर दिया।

 

सूत्रों के अनुसार पत्रकार और थाना प्रभारी के बीच हुई बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग भी सामने आई है। पुलिस का कहना है कि रिकॉर्डिंग से यह स्पष्ट होता है कि बच्चों को थाने में रोककर पूछताछ करने जैसी बातें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।

 

मामले के बाद पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी संवेदनशील विषय से जुड़ी जानकारी साझा करने से पहले तथ्यों की पुष्टि अवश्य करें, ताकि अफवाह और भ्रम की स्थिति से बचा जा सके।

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gc goyal rajan
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