बाल मन की कल्पनाओं ने रचा कविता का संसार, 39 स्कूलों के नन्हे कवियों ने जीता दिल

अर्जुन रौतेला आगरा। प्रिल्यूड पब्लिक स्कूल, दयालबाग में आयोजित अंतर्विद्यालयी बाल कवि सम्मेलन में 39 विद्यालयों से आए बाल कवियों ने अपनी स्वरचित कविताओं के माध्यम से रचनात्मक प्रतिभा और संवेदनशील सोच का प्रभावशाली परिचय दिया। देशप्रेम, पर्यावरण संरक्षण, नारी सम्मान, बाल अधिकार, प्रकृति, परिवार, मानवीय संवेदनाओं और समसामयिक सामाजिक विषयों पर बाल कवियों की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आर्ट ऑफ लिविंग के वरिष्ठ प्रशिक्षक एवं शासकीय कार्यक्रमों के राज्य निदेशक प्रदीप कुमार पाठक रहे। उन्होंने बाल प्रतिभाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि उचित अवसर, प्रोत्साहन और मंच मिलने पर बाल प्रतिभाएं भविष्य में समाज और राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को साहित्य के प्रति रुचि बनाए रखने तथा निरंतर पढ़ने, सीखने और सृजन करने के लिए प्रेरित किया।


प्रधानाचार्या ने प्रतिभागी बाल कवियों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्हें निर्भीक होकर अपनी रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया। कवि सम्मेलन की समन्वयिका बबीता रानी ने प्रतियोगिता के नियमों और आवश्यक निर्देशों की जानकारी दी। तीन वर्गों में आयोजित काव्य-पाठ में विद्यार्थियों ने अपनी मौलिक रचनाओं से साहित्यिक प्रतिभा का परिचय दिया।
निर्णायक मंडल में प्रो. युवराज सिंह ‘युवा’, डॉ. अनिता सिंह, डॉ. नीलम यादव, श्रुति सिन्हा, डॉ. अरुण उपाध्याय, कुमार ललित, डॉ. निशीथ गौर, डॉ. शालिनी श्रीवास्तव एवं ईशान देव शामिल रहे। निर्णायकों ने मौलिक लेखन, विषय-वस्तु, भावाभिव्यक्ति, उच्चारण, लय, स्वर, प्रस्तुति-कौशल और मंचीय प्रभाव के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया। उन्होंने बाल कवियों की प्रस्तुतियों में विषय-विविधता और भाषा की सुंदरता की सराहना की।


प्रतिभागियों एवं अतिथियों के स्वागत में अनिका यादव की मनमोहक नृत्य प्रस्तुति ने समारोह में सांस्कृतिक रंग भर दिया। प्रत्येक वर्ग से पांच-पांच श्रेष्ठ बाल कवियों एवं कवयित्रियों को स्मृति-चिह्न एवं सम्मान पत्र प्रदान किए गए, जबकि सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया।
काव्य कली समूह में अन्वेषा शर्मा, भविषा, अंशिका दुबे, जाह्नवी भारद्वाज और आध्या शर्मा श्रेष्ठ रहे। कवितांश समूह में तानिया बंसल, आर्य गोयल, आराध्या राठौर, हर्ष प्रताप यादव और अनिका शर्मा ने स्थान बनाया। सृजन सरिता समूह में रुद्राक्षी चंद्रा, स्वाति सिंह, वैष्णवी शर्मा, प्रतीक्षा शर्मा और पल्लवी तिवारी श्रेष्ठ बाल कवि-कवयित्रियों के रूप में चयनित हुए।


विद्यालय निदेशक डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा कि प्रत्येक बालक में सृजन की अनूठी क्षमता होती है। सही मंच और प्रोत्साहन मिलने पर यही प्रतिभा भविष्य में समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कार्यक्रम का संचालन विद्यालय की अनन्या वर्मा, नितान्या अरोड़ा एवं कैफ़ शम्सी ने प्रभावशाली ढंग से किया।

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gc goyal rajan
  • अर्जुन रौतेला आगरा

    रंग लाती है हिना पत्थर से पिस जाने के बाद। सुर्ख रूह होता है इंसान ठोकरें खाने के बाद।। मेहंदी का रंग प्राप्त करने के लिए उसको पत्थर पर पिसा जाता है, तब लोग उसकी तरफ आकर्षित होते हैं, ठीक उसी तरह मनुष्य जो जितना "दर्द अथवा कठिन कर्म" करता है, लोग उसी की तरफ आकर्षित होते हैं।

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